Village- Kalaigaon, P.O. Kabirali, B.T.A.D. Udalguri (Assam) India

मुरादेउर देवालय

गाँव-  कलाईगाँव , डाक- कबीराली, बी.टी.ए.दी., उदलगुरी (असम) भारत

नमस्कार आज में अबिभक्त दररंग जिल्ला का एक बहुतही प्राचीन देवालय के बारे में थोड़ासा जानकारी  देनेकी प्रयाश करता हु -

कलाईगाँव से लगभग 10 की. मी. उत्तर दिशा में मुरादेउर देवालय या मंदिर स्तित हे। जानकारो के अनुसार ये मंदिर आठवी-दसवी शतिका का हे। लग भग 1000 बर्ष पुरानी हे ये मंदिर। इस मंदिर का खास बात ये हे इसका कुण्ड। जो प्राचीन मंदिर के साथ मिटटी में दबा हुआ हे।


प्राचीन मंदिर की ऊपर का हिस्सा भूकम्प या अन्य प्राकृतिक कारणों से संपूर्ण टुटा हुबा हे। ये मंदिर ईट से निर्मित हे। लेकिन सामने के मूल द्वार  पथरोसे निर्मित हे। प्रबेश द्वार के ऊपर श्रीगणेश जी का एक मूर्ति हे।



कुण्ड के अंदर दो खम्बे हे। इस कुंड के पानी ठंडी और साफ हे। कुण्ड तथा मूल मंदिर के पास निर्मित मंदिर गृह में दूसरे 14 अलग अलग देवी-देवताओ का आसन हे। यहाँ पर रोज पूजा की जाती हे। येही पर एक बरे पत्थरो में नरसिम्हा का मूर्ति हे।

संग्रहालय

इस मंदिर के ठीक पछिम दिसा में एक बरा तालाब हे। इस तालाब का पानी बहुतही गभीर हे। इस तालाब का पानी जॉब बढ़ती हे तो मंदिर की कुण्ड में भी पानी बढ़ती हे। तालाब में पानी कम होते हे तो कुण्ड में भी पानी कम होते हे। सालो पेहेले कुण्ड में दूध डालने के बाद इस तालाब में देखा जाता था।इस तालाब के और एक खास बात हे की कभी कभी इसका पानी असनक बहुत बढ़ जाता हे। तब पुब दिशा में एक नल कटा हुआ हे। इस नाले से बढ़ा हुवा पानी बाहर जाने को दिए जाते हे। इसीलिए इस तालाब में नहाना, कपड़ा धोना, हॉट-पैर आदि धोना मना हे।



नरबलि बैठ ने का पथरोका आसन 

कहा जाता हे की प्राचीन कालो में इस मंदिर में नरबलि दीया जाता था। नरबलि देते थे लेकिन कोई जोर जबरदस्ती नही किया जाता था। बलि खुद आकर सर जाते थे। प्रामाणिक तोर पर बलि बैठने केलिए इस्तेमाल किया गया पथरोका आसन, बलिसाल साथ में नरबलि का तलवार आदि आज भी यहा रखा हुवा हे।

 

14 बिभिन्न देव्-देविओ की मिटटी का आसन

ईए मंदिर बहुतही प्रासिन हे इसको सहेज ही अनुमान किया जाता हे। इसका निर्माण शैली, यहाँ पर रखे गई बिविन्ना पथरो, सामने का तालाब, 14 बिभिन्न देव्-देविओ की मिटटी का आसन आदि में काफी सारे इतिहास छुपे हुए हे। इन सभी दिशाओ के ऊपर नई पीड़ि की लोगो केलिए अध्ययन करने के पर्याप्त सामान मजुत हे।


 

मंदिर की डेयरी (पुजारी) श्रीदीपेन मेधी जो मंदिर की सभी बाते  अच्छी  से कहते हे। 

इस के इलेबा इये सुगभीर कुण्ड सहित प्राचीन मंदिर तूट गई हे. इसे अच्छी तरह संरक्षण करना साहिये। ताकि आने बाले पीढ़ी इसे देख सके और इस मंदिर में आने का जो आधात्मिक मजा वो ले सके। 


मंदिर का तालाब 

अंत में आशा करता हु की ये प्राचीन देवालय को पूरी दुनिआ के सामने प्रचार हो इसे देखे और ये मुरदेउर देवालय का जो गरिमा वो हमेशा हमेशा केलिए अटूट रहे। 

ॐ नमः शिवाय 

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