Vill- Maharipara, P.O.& P.O- Duni, Dist.- Darrang (Assam), India, PIN-

श्री श्री रुद्रेस्वर देवालय

गाँव- महरिपरा, डाक- दूनी, थाना- दूनी, जिल्ला- दररंग (असम) भारत, पिन-


दूनी नाम का ये गाँव दर्रांग जिल्ला का एक बहुत भीतरी इलाका है। गाँव का असली रूप यहाँ दिखा जाता है। इसी दूनी में महरिपरा नाम का एक गाँव में असम सरकार का स्वीकृत दर्रांग जिल्ला का इतिहास प्रशिद्ध श्री श्री रुद्रेस्वर देवालय स्थित है। 


ये स्थान बहुतही सुन्दर ओर शांत हे। सारो ओर नए पुराणी पेड़ के साथ दो बरसा तालाब है। देवालय के सामने एक 12 बीघा जमीन का तालाब हे जिसका नेम रुद्रसागर है। मूल मंदिर के पीछे की तरफ एक छोटा तालाब हे। मंदिर की दाएं तरफ एक भोजनालय ओर बाएं तरफ एक संग्रहालय है। इस संग्रहालय में पुर्ब मंदिर का भग्नोबसेस रखा हुवा हे। बहार में भी कुछ पत्थर परा हुआ हे।


देवालय के अंदर गर्भागृह में एक शिवलिंग ओर पुब दिशा में एक बिष्णु का मूर्ति है। यहाँ पर रोज़ पूजा होता है। गर्भागृह में जाना मना हे। सिर्फ पुजारी ही बहा जा सकता है। इस देवालय के अंदर सिर्फ घी का दिब्या जलाया जाता हे। यहाँ रोज पकाया हुआ भुग सरया जाता हे। भुग सराने के बाद लोगोको भूग खाने देते हे। भुग अति सोवडिस्ट होती हे। भुग बनने की कुछ नियम हे, इस में पकने बाले सीज निर्धारित हे। बहुत सरे सब्जियां भुग में शामिल नहीं कर सकता। पुर्ब परम्परा के अनुसार ये भुग पकाया जाता हे। भुग देवालय के मूल पुरोहित ने खोद पकाते है। देवालय दर्शन कर इसका स्वादिस्ट भुग खाने का आनंद ही कुछ ओर है। 


इस देवालय को अहोम राजा गौरीनाथ सिंघा ने संग 1708 शताब्दी में बहुत सरे जमीन ताम्रपत्र में लिख कर दी थी। ये ताम्रपत्र असम सरकार के संग्रहालय में सुरकसित हे। इसे जन कर ये माना जाता हे की निस्सित रूप से उस समय में ये देवालय बहुत ही बरा होने के साथ साथ पूजा का परिषर भी बहुत बरा था। देवालय में सायद बहुत सरे पुजारी ओर भक्त हमेशा भराहुवा रहताथा। इसीलिए उन लोगो केलिए खान पान ओर देवालय में पूजापाठ बिधि बिधान के अनुसार निरन्तर सलटा रहे इसी कारन राजा ने ये सुबिधा प्रदान करके रखा था।

Main Pujari Sri Champa Ram Sarma (Last 35 years till now)


Deuri Sri Sarat Kalita (Lat 4 years till now)

आज से 400 साल पहले उस समय का राजा ने इस दवलय को दी गए मान्यता आज की पीढ़ी गभीरता से शोसना साहिए। गाँव का प्राकृतिक रूप ओर देवालय का सन्नाटा काफी आकर्सित है। इन सभी डिसाओ पर रिचार्च करने के लिये बहुत कुछ हे। जो अभी भी लोगो को मालूम नहीं।ईसिलिए बर्तमान नए पीढ़ी के लोग दर्रांग गौरव श्री श्री रुद्रेस्वर देवालय का प्रचार के लिए नए तरीके इस्तेमाल करने से निशित रूप से देवालय के शक्ति इस इलाका के साथ साथ हम सभी को उजाले की तरफ ले जायेगा।   



Old Temple (2000)

अंत में यही आसा रखंगे की देवालय में पूजा की पुर्ब का कोई भी परंपरा कमी ना हो। बल्कि ये परंपरा ओर मजबूत हो। 

ॐ नमः शिवाय।

1 Comments

Thank you for Visiting

  1. Thanks for sharing the information. We are very much proud of our ancestors. Proper preservation and research to be done.

    ReplyDelete

Post a Comment

Thank you for Visiting

Previous Post Next Post