Vill- Mowamari, P.O.- Mangaldai, P.S. Mangaldai, Dist- Darrang, PIN- 784125, India

सिरसेउज कृखीपाम समबाई समिति 

गाँव- मोवामारी, डाक- मंगलदाई, थाना- मंगलदाई, जिल्ला- दररंग, पिन- ७८४८२५, भारत


दर्रांग जिला का सदर मंगलदाई सहर के ठीक बिज़ में ही मंगलदाई पुलिश स्टेशन हे।  इस मंगलदाई पुलिश ठाणे के ठीक दक्षिण दिशा में जानेवाला रास्ता से लग-भाग 4-5 किलोमीटर अंदर जाने से महाबाहु ब्रह्मपुत्र के मोवामारी नाम का गाँव में ये सिरसेउज कृखीपाम समबाई समिति नामका कृखी पाम स्थित हे। वोहा जाने का रास्ता अत्चा, पक्का हे। लेकिन इस कृखी पाम के थोड़ी आगे के रास्ता मिटटी का हे। वर्तमान सरोवर हरा-भरा परिबेश हे, मरापात, गन्ने अदि की खेत से परिबेश बहुतही सुन्दर हे। 




इतिहास :
ये कृखी पाम कहानी सुरु होता हे ऐतिहासिक असम आन्दोलन सं 1983 के बुनियाद से। उस  समय में बहुतही मेहनत और त्याग से नए पीढ़ी के लोगो ने इस चार अंचल में पूरी सहस से तबके मुठ 1300 बीघा जमीन में इस कृखी पाम को स्थापित किया था। लेकिन प्रतिष्ठा कल के 1300 बीघा जमीन बिभिन करणबस वर्तमान करीब 500 बीघा जमीन में ये कृखी पाम बसा हुवा हे। जहा पूरी 60 घर लोग साथ में खेती कर के अपने अपने परिबार के साथ जीवन संग्राम में लगे हुवे हे। इस समबाई में इस 60 घर लोगो की परिबरोने बिभिन्न कृखी कार्य से जीवन निर्बा कर रहे हे। वर्तमान गन्ना, मरापात की खेत से भरा हुवा हे। यहाँ दो बड़ा तालाब भी हे जहा मछलिया पालन होता हे। कृखी पाम के अंदर एक मंदिर भी हे। इसी मंदिर में ये लोग साथ में बैठ कर कृखी पाम के बारे में बात करते हे। इसी मंदिर को अपना कार्यालय के रूप में इस्तेमाल करता हे। यहॉ इन लोगो ने बिहू उतसव आदि पालन करके असमिया संस्कृति बनाए रख ने का भी प्रयास जारी रखा हे। इन लोगो का अपना बातछो का देखभाल, पढ़ना-लिखना अदि के बारे में भी बहुत सजक हे। 

****  इस तरह सर अंचल में कृखी पाम स्थापित करके कठोर परिश्रम से अपना जीवन संग्राम में जोड़ा हुवा इन लोगो के कर्म प्रेरणा हमारा समाज के लिए एक बहुत बड़ा आदर्श होगा। इन लोगो की परिश्रम और त्याग से बना होवा ये कृखी पाम आनेवाला परजन्म  केलिए एक प्रेरणा बनेगा। 







समाप्त :
वर्तमान नए परजन्म के लोग कृखी कर्म से जोड़ना नहीं साथै।  सभी लोग सिर्फ नकरी या बिज़नेस आदि करके धन कामना और आराम से अपना जीवन निर्बाह करने का कल्पना कर रहे हे। अर माँ-बाप भी यही सहते की उनके संतान कोई ज्यादा शारीरिक परिश्रम न करे। परन्तु सिर्फ पैसे से किया जीवन चलता हे ? परिश्रम न करने से किया ये शरीर ठीक रहेगा ? महीने के बाद जो तनखा मिलेगा उससे तो पेट नहीं भरेगा ? होमे खाद्य ही खाना होगा अगर सभी लोग नकरी ही करने सहते हे तो खाद्य कोण उत्पादन करेगा यानि खेती कोण करेगा ? ये सवाल एकबार खोद से पूछने समय हो गया हे। 

***  इस कृखी पाम ने हमारे लिए एक नए आशा का मार्ग दिखता हे। हमारा बिसेष रूप से दर्रांग जिला का लग-भाग सभी सर अंचल गैर असमिया लोगोके कब्जे में हे। इन परिस्थिति में ये असमिया लोग सर अंचल में घर बसा कर खेती करके जीवन निर्बाह करने का फैसला छाच में हमारे लिए गौरव तथा प्रेरणा का बिसय हे। 

***  आशा करता हु की इस कृखी पाम तथा इसमें बेस हुए 60 घर लोग और उनके परिवार केलिय सरकार तथा N.G.O., ससेतन लोग इसके लिए कुछ करे। और हमारा लोगो से अनुरोध ये हे की अपना बातसो को इस तरह की कृखी पाम को देखने के लिए जाने दे या खोद ले के जाये। जहा जीवन और म्हणत का हरा-भरा सत्सा चाबी खोद देखे ओर इसे अनुभव करे। 

***  अंत: में इस कृखी पाम का पूर्ब जमीन पुनः वापस लाने का व्यबस्था करे और सममई को एक आदर्श कृखी पाम की रूप में निर्माण करे और असमिया समाज तथा दर्रांग बसी के लिए गौरव बन कर दुनिया के सामने समक उठे। 

***  जोई तो सिरसेउज समबाई समिति तथा इसमें बसे हुवे 60 घर लोगोके परिवार आप लोगोंने मानव तथा समाज केलिए थोड़ा बहुत खाद्य उत्पादन जैसा महान कार्य में न्युजीत हुवा हे जिस से खा कर हम सभी जिन्दा हु। धन्य हे आपलोग , धन्य हे आपनोगो का साहस। 


----  नमस्कार ------

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