Vill- Dewalkhand, P.O.&P.S.- Mazbat, District- Udalguri, B,T.A.D. (Assam), PIN- 784507, India
देवलखांड
गाँव- देवलखांड, डाक- माज़बात, थाना- माज़बात, जिल्ला- उदालगुरी, बी. टी. ए.दी. (असम), पिन- ७८४५०७
परिचय :
अबिभक्त दर्रांग जिल्ला के माज़बात सहर से लग-भाग 9 -10 किलोमीटर पूब दिशा में एक बहुतही भीतरी इलाके का देवलखांड नाम के एक गाँव में ये प्राचीन मंदिर स्थित हे। द्वापर युग में बानराजा ने इस मंदिर को निर्माण किया था। वर्त्तमान पूर्ब मंदिर का भग्नावसेस यहां पर रखा हुवा हे। मंदिर में स्थापित शिवलिंग भी द्वापर युगका बहुतही सुन्दर हे।
वर्त्तमान स्थिति :
माज़बात सेहर तक कोई भी गाड़ी या रेल से आरामसे जाया जा सकता हे। माज़बात रेल स्टेशन सोतासा एक बहुतही सुन्दर स्टेशन हे। लेकिन मंदिर तक जाने का रास्ता बहुतही ख़राब और यातायात का कोई ब्यबस्था नहीं हे। ब्यक्तिगत गाड़ी या भरा गाड़ी (यहां मिलता हे) से मंदिर तक जाना होगा। जब मंदिर की तरफ आगे बढ़ेंगे तब ऐसे लगेगा की कब ये मंदिर मिलेगा। ये एक बहुतही गभीर अनुभव हे। लेकिन आतशी खबर ये हे की वर्त्तमान रास्ता, पुल आदि B.T.A.D. सरकार ने जोरदार तरीके से निर्माण कर रहा हे। बहुतही जल्द यातायात का सुन्दर ब्यबस्था निश्चित रूप से हो जायेगा। प्रसार के दिशा में ये इतना बड़ा इलाका बिलकुल ही पीछे हे। यहाँ बरो, राभा, बिहारी, आदिबाशी और नेपाली सम्प्रदाय के निबाश करते हे।
मंदिर की सरोवर अभीभी जंगल देखा जाता हे। मंदिर की पश्चिम दिशा एक बड़ा सा तालाब था। इस तालाब का सारे किनारे अभीभी मजुत हे। लेकिन अभी ये तालाब मंदिर के हाथ में नहीं हे। पुजारी के अनुशार इस तालाब के पश्चिम कोने में बानराजाने खोद खोदाई किया एक स्थान हे। जिसमे होमेसा थोड़ा पानी रहता था। पिचले कुछ दिनों तक ये वहाँ मजुत था। लेकिन अब इस स्थान को भी किसीतरह नस्ट करके खेती करने का ब्यबस्था किया गया हे। वर्त्तमान मंदिर के पास 9 बीघा जमीन हे।
पुजारी श्रीउमा संकर पण्डे
पुजारी श्रीउमा संकर पण्डे अपनी पिता के बाद इस मंदिर में पूजा-पाठ करने के साथ साथ मंदिर का देख-भाल भी बहुतही निष्ठा से कर रहा हे। उत्स्वाव :
इस मंदिर में शिवरात्रि का पर्ब पूरी 5 दिनों तक मनाया जाता हे। इसके अलवा अन्नप्रासन्न, चूड़ाकरण, बिबाह आदि अनुष्ठान यहाँ सम्पन्न किया जाता हे।
समाप्त :
प्रसार और प्रखार की दिशा में ये मंदिर भी बिलकुल अंधकार में है। ऐसा लगता हे की इस प्राचीन मंदिर की बारे में लोगोको बहुतही काम जानकारी हे। इसी कारन मंदिर और आस-पास मजुत प्राचीन सीजे, शिल्प-कला आदि सम्पति का भंडार होमेसा केलिए लुप्त हो गया हे। यहाँ पर आतशी तरह ध्यान दे के देखा जाय तो मंदिर के आस-पास पुरातत्वा बिभाग के द्वारा खोदाई करने से भुतही सीजे उधार हो सकता हे। किउकी वर्त्तमान भी ये स्थान जंगलो से भरा हुवा हे। आस-पास लोगोका निबाश भी बहुतही काम हे। दूसरी तरफ ब्यक्तिगत अधीन मंदिर के पश्चिम दिशा में स्थित तालाब के सारो किनारे देखनेसे ये अनुमान होता हे इस तालाब में भी अतीत का बहुत सरे चीजे छुपा हुआ हे। खोद बानराजाने खोदाई किया स्थान को वर्त्तमान नस्ट करके खेती किया हे फिरभी उसे उधर करने का ब्यबस्था निश्चित रूपसे किया जा सरकता हे। इस अलौकिक स्थान को उधार और संरक्षण करना समाज के साथ साथ सरकार और पुरात्वत्वा बिभाग को भी जिम्मेवारी हे। गाँव के लोग शिक्षा की दिशा में पिसरा हुवा हे। इसीलिए समाज के लोग, संगठन आदि आगे आकर इस प्राचीन मंदिर के प्राचीन संपत्ति समूह उधार और संरक्षण करने केलिए लोगोके बीज सजागता जगाना सहये। साथ में सरकार और पुरातत्वा बिभाग ने इस प्राचीन मंदिर तथा बानराजाने खोदाई किया स्थान को उधार करके बहुतही जल्द संरक्षण का ब्यबस्था करना सहिये। तभी ये प्राचीन मंदिर दुनिया के सामने फिर पुर्ब गरिमा के साथ समक उठेगा।
- ॐ देवलखांड नमः -
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