Locaton : Vill- Lojora, P.O. Barigaon No. 2, P.S. Sipajhar, PIN- 784147, India
गाँव - लोजोरा, डाक- बड़ीगाँव नो. २, थाना- छिपाझार, पिन- ७८४१४७, भारत
नमस्कार ! आज दररंग जिला का एक प्रचार और प्रसार की माध्यम से काफी दूर स्थित एक आध्यात्मिक केंद्र श्रीश्री रंधनी सत्र के बारे में कुछ जानकारी देने का प्रयाश कर रहा हु।
परिचय :
दररंग जिला का सदर मंगलदोई शहर के पछिम-उत्तर कोने में लग-भाग 14-15 की:मि: दुरी में प्राकृतिक रूप से भरपूर लोजोरा नाम का एक गाँव में ये श्रीश्रीरांधणी सत्र स्थित हे। दरंग जिला का प्राचीन सत्र समूह के बीच ये रांधणी सत्र भी एक हे। प्रचार माध्यम से काफी दूर रहते हुवे ये सत्र अपने अस्तित्वा के ऊपर भी एक चुनौती हे। जानकारी की आभाव के कारन सायद सरकारी तरफ से भी किचीभी तरह का सहायता मिला नहीं हे। वर्तमान गाँव का परिबेश, रास्ता अदि कभी उन्नत हुवा हे। लकिन इस रांधणी सत्र तक जाने केलिए जो रास्ता हे वो काफी छोटा हे। गाँव के मूल रस्ते की पछिम दिशा में कृषि भूमि की तरफ एक बहुति छोटा सा रास्ता लग भग 3-4 फुट का होगा इसी रस्ते से जाने से थोड़ी ही दूर में खेत के बीच ये रंधनी सत्र पाया जाता हे।
वर्तमान स्थिति : वर्तमान सत्र का मंदिर गृह, सामान रखने का घर आदि स्थानीय लोगोकी सहयोग से कंक्रीट से निर्माण कार्य चल रहा हे। इस रांधणी सत्र के नाम बार 3 बीघा जमीन हे। इसमें एक तालाब भी हे। सत्र के सरोअर कृषि भूमि से घेरा हुवा होने का कारन इसका प्राकृतक परिबेश बहुतही खूबसूरत हे। सत्र के मणिकूट में देउरी के द्वारा हर दिन शुभा श्याम पूजा देने साथ साथ नाम कीर्तन का अभ्यास भी होता हे।
इतिहास :
-- ये श्रीश्री रांधणी सत्र जानकारों की अनुसार श्रीमंत शंकरदेव की समय से भी पहले का हे। कोच राजा नरनारायण और चीलराई ने इस रांधणी सत्र को प्रोत्साहन दिया और बहुत सारे जमीन जायदात देबोत्तार दान दिया था। ये सब बिभिन्न पुस्तक में उल्लेख हे।
-- पूर्ब जमाने में यहाँ के गाँव के लोग सत्र मंदिर के सामने निवास किया था लेकिन उस जमाने की कुछ कारन बस गाँव के लोग पूब दिशा में सेले गए थे और ये सत्र गाँव के पीछे यानि पछिम दिशा में कुछ दूर खेत के बीज रह गए हे। तब तो ये सत्र गृह लकड़ी का था अब धीरे धीरे बन रहा हे।
-- ये श्रीश्री रांधणी सत्र के स्थापित काल और इस से जोड़े हुवे कुछ इतिहास बिभिन्न पुस्तिका में प्रकाशित हुवा हे। खासकर राजा नरनारायण और चीलराई के शासन काल से जोड़ा हुवा कुछ बाटे उल्लेख हे।
स्थापित : प्राचीन
संहति : ये रांधणी सत्र पुरुष संहति के अनुसार चलता हे।
सम्पति : 3 बीघा भूमि, देऊळ उत्सव में इस्तेमाल होने वाला राजा के ज़माने
का एक मगर और एक तालाब हे।
वर्तमान शिष्य : 500 घर शिष्य हे।
उत्सव :
*** हर साल बैसाख महीने की 1 तारीख को यहां एक देउल उत्सव मनाया जाता हे।
*** इस रांधणी सत्र का मूल कार्य पुथिनेसिया भक्त नमक एक पन्था से होता हे यानी यहाँ का शरण-भजन का कार्य इसी पन्था से होता हे।
*** सत्र में नियमित रूप से व्यास का ओझा, नाम-कीर्तन आदि अभ्यास होता हे।
समाप्त :
-- वर्तमान इस श्रीश्री रांधणी सत्र को सरकार की तरफ से संरक्षण करना बहुतही जरुरी हे। स्थानीय लोगोको इसका प्रचार और प्रसार के दिशा में काम करना साहिए। साथ में इस श्रीश्री रांधणी सत्र का प्राचीन इतिहास निकल कर उचित तरीके से संरक्षण और प्रकाशित करके हमारा आनेवाला नए पीढ़ी की लोगो को आध्यात्मिक तथा सांस्कृतिक दिशा के प्रति आकर्षित करने की प्रयाश करे।
-- अंत ये आशा करता हु की ये श्रीश्री रांधणी सत्र आनेवाला दिनों में दुनिया के सामने अपना गरीमा उजागर कर सके।
ॐ
really nice post
ReplyDeleteThat you are a blogger I find you near me.I am from Dhula Darrang.
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Thank you for Visiting