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| बामुण्डी सत्र |
आरंभ :
असम के दर्रांग जिला में श्रीश्रीबामुण्डी सत्र नामका एक बहुतही प्राचीन आध्यात्मिक केंद्र हे। दर्रांग जिला के सदर मंगलदाई सहर से लग भाग 10-12 की: मि: दुरी में पछिम दिशाओ के ओर निज दही नाम का एक सोतसा गाँव में ये सत्र या मंदिर स्थित हे। ये श्रीश्रीबामुण्डी सत्र बहुतही प्राचीन हो कर भी अबतक प्रचार और प्रसार की तरप से बिलकुल ही अंधकार में हे। आधुनिक मिडिया भी आजतक इसे दिखाया नहीं हे।
इस बामुण्डी सत्र का भी प्रतिष्ठा कल की कोई लिखित इतिहास नहीं हे। और स्थापित समय का कोई सं या तारीख का कोई जानकारी नहीं हे। फिर भी वर्त्तमान सत्राधिकार के अनुसार ये बामुण्डी सत्र 1600 शाटिका के अंतिम भाग या 1700 शाटिका के पहली भाग में स्थापित होने का जानकारी दी। प्रतिष्ठा कल से एक ही परिवार के लोग ही बंशनुसार परम्परा से इस सत्र का काम-काज जारी रखा हे। इतिहास की रूप में सं 1982 में प्रकाशित कविता के रूप में एक सोता से पुस्तक हे। इसे बामुण्डी सत्र का पूर्व सत्राधिकार स्वर्गीय मुक्तादेव गोस्वामी ने लिखा हुवा हे। इसी पुस्तक में इस बामुण्डी सत्र के पूवपुरुसो का नाम क्रमानुसार उल्लेख किया हुआ हे। और श्रीश्रीबामुण्डी सत्र प्रतिस्टा होने का सारा विबरण इस पुस्तक में लिखा हुवा हे। इस पुस्तक में बामुण्डी सत्र प्रतिष्ठा कल का कोई सं या तारीख का उल्लेख नहीं हे।
श्रीश्रीबामुण्डी सत्र का सम्पति :
👉 इस बामुण्डी सत्र में सम्पद के रूप में एक बहुतही प्राचीन शालग्राम, सत्र के पूर्वजोंका पादुका, और 2 प्राचीन सशिपतिया हाथ से लिखा हुवा पुस्तक सत्र के मणिकूट के अंदर मूल स्थानों में रखा हुवा हे। लेकिन उपयुक्त संरक्षण के आभाव के कारन ये सब ज्यादातर नस्ट हो रहा हे। इसे उपयुक्त संरक्षण का बहुतही आवश्यक हे। और १० बीघा जमीन भी होने का जानकारी वर्तमान सत्राधिकार ने दी।
👉 श्रीश्रीबामुण्डी सत्र का कई शाखा असम के बिभिन्न स्थानों में स्थापित हे। उनमे से - दर्रांग जिला के अंदर २ हे। एक निज दही गाँव और दूसरा छिपाझार का लोकरई नाम के गाँव में हे। उदालगुरी जिले में बेंगबारी नाम का एक गाँव में हे। कामरूप जिले में गुवाहाटी शालमरा में इस बामुण्डी सत्र का शाखा स्थित हे। और एक शाखा सोनितपुर जिला में भी होने का जानकारी सत्राधिकार ने दी।
वर्तमान स्थिति :
👉 वर्तमान ये श्रीश्री बामुण्डी सत्र सत्राधिकार श्रीवशिष्ठ गोस्वामी जी के निज गृह भूमि में स्थापित ह। देखने में एक घरेलु मंदिर जैसा लगता हे। फिरभी यहाँ पर सत्र का परम्परा के अनुसार सभी तिथि केंड्रिक उतसव अदि अनुष्ठान सोडिओसे उदजापित करने के साथ साथ हरदिन पूजा पाठ चल रहा हे। साथ में भक्तो को भी शरण-भजन देने का काम भी नियमित परम्परा के अनुसार चल रहे हे। वर्तमान ये श्रीश्री बामुण्डी सत्र के बहुतसारे शिष्य भी हे। सत्राधिकार के अनुसार लग भाग १ एक हजार से भी ज्यादा परिवार के लोग इस सत्र में शिष्य बन कर शरण-भजन ले कर आध्यात्मिक शिक्षा प्राप्त की। ये शिष्य दर्रांग जिला के साथ साथ असम के कई स्थानों में फैला हुवा हे।
👉 इस बामुण्डी सत्र में हरदिन सुबह श्याम पूजा-पाठ होने के साथ साथ नाम कीर्तन आदि सत्र परम्परा से नियमित अभ्यास किया जाता हे।
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| Satradhikar Sri Basistra Goswami |
इतिहास :
👉 आज से कई सालो पहले एक सात्विक पुरुष इसी इलाके में रहने केलिए आते हे उन्होने इसी गाँव में ये श्रीश्री बामुण्डी सत्र का स्थापित करके स्थानीय लोगो को आध्यात्मिकता का ज्ञान अभ्यास करने का सुरु किया था। सायद तभी से इस सत्र में माघ महीने की पूर्णिमा तिथि के दिन हरिहर सभा नाम का एक बार्षिक उतसव बरी धूम धाम से मनाया जाता हे। इस हरिहर सभा में बामुण्डी सत्र का सभी शिष्य बिभिन्न स्थानों से आकर एक दूसरे से मिल जाता हे। और गुरु-शिष्य का भी मिलन होता हे। इस हरिहर सभा नाम का उतसव इस बामुण्डी सत्र का मुख्यतः मूल अनुष्ठान हे। यहाँ थोड़ा बहुत भक्त हरदिन बिभिन्न स्थानों से आते हे और प्रशाद सराके जाते हे।
👉 इस श्रीश्री बामुण्डी सत्र में रखा हुवा मुख्य सम्पद हे यहाँ का शालग्राम जिसको अतसी तरह से साफ करने से दर्पण जैसा साफ और सुन्दर होता हे और तब इसे देखने में बहुतही खूबसूरत लगता हे। बहुतही प्राचीन ये शालग्राम सत्र स्थापित होने की समय से यहाँ पर रखा हुवा हे। इस शालग्राम का महत्वा ये हे की इसका जल ऋतुजनित बुखार जिसे स्थानीय लोग आई, बसंत आदि बोलते हे रोगोसे आराम मिलता हे और इसका प्रमाण हे। इसीलिए स्थानीय और आस-पास के बहुत सरे लोग अपनी परिवार में किसीका बुखार होने पे खासकर छोटा बातचा ये जल भक्ति भाव से ले जाता हे और फल मिलता हे।
👉 वर्तमान इस इलाका समूह थोड़ा उन्नत हुवा हे किउकी कुछ साल पहले तक यहाँ का रास्ता-घाट आदि बहुतही ख़राब हुवा करता था। इस हिसाब से देखा जाए तो आज से १००-२०० साल पहले यहाँ का हालत कैसा होगा। इसीलिए इस तरह की इलाके में इस तरह की आध्यात्मिक केंद्र प्रतिष्ठा करनेकी आर में कितनी महान उदेश्य रहा होगा और इसे बरक़रार रखना कितनी मुश्किल रहा होगा।
👉 ये श्रीश्री बामुण्डी सत्र एक सार्बजनिक स्थान के अलावा सत्राधिकार की आंगन में ही प्रतिष्ठित हे मंदिर गृह तथा मणिकूट बहुतही छोटा और देखने में बहुतही सुन्दर हे। साथ में यहाँ का लोग भी सहज-सरल और ये गाँव भी सुन्दर हे।
समाप्त :
👉 दर्रांग जिला का ये प्राचीन आध्यात्मिक केंद्र श्रीश्रीबामुण्डी सत्र ने आज की आधुनिक समाज में प्रचार और प्रसर पाने के लिए उतना सफल हुवा नहीं जितना होने सहीए था। आज-काल का आधुनिक मिडिया से भी काफी दूर में ही है। इस बामुण्डी सत्र ने आजतक सरकार या गैर सरकारी किसीसे भी कोई आर्थिक या दूसरी सहायता प्राप्त किया नहीं। इसीलिए वर्तमान श्रीश्रीबामुण्डी सत्र को सरकार की तरप से संरक्षण करना बहुतही जरुरी हे। किउकी मंदिर में रखा हुवा थोड़ी सी प्राचीन मूल्यवान सम्पद शालग्राम, पादुका और प्राचीन पुस्तके नस्ट होने लगा हे। इसे उपयुक्त संरक्षण की ब्यवस्था होना सहीए। नहीं तो आनेवाला खूब काम समय के अंदर ये अमूल्य सम्पद समूह पूरी तरह नस्ट हो सकता हे। साथ में प्रसार और प्रखर के सात साथ इसे उन्नत करने के लिए स्थानीय लोग तथा मंदिर सत्र पक्ष को भी आगे आना होगा।
👉 एक महत्पूर्ण बात ये ही की भक्त प्राण लोगों के लिए श्रीश्रीबामुण्डी सत्र के नाम कमसे कम एक नाम फलक या तोरण गेट किसी एक निदिष्ट स्थान पर होना बहुतही आवश्यक हे, ताकि भक्त समाज को आसानी से ओहा जा सके। ढूंढ़ने में कोई दिक्कत न हो। नाम फलक या एक सुन्दर तोरण होने से इसका प्रचार भी होता हे।
👉 अंत में ये आशा करता हु की ये श्रीश्रीबामुण्डी सत्र आनेवाला दिनों में सभी दिशा में उन्नत हो और इस गाँव के लोगोके साथ साथ दर्ऱण बसी लोगोका गौरव के केंद्र बने और चारि दुनिया में ये श्रीश्रीबामुण्डी सत्र समक उठे।
ॐ






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