Vill+P.O. Howlymohanpur, P.S.- Mangaldai, Dist.- Darrang (Assam), PIN- 784125, India
प्राचीन दुर्गा पूजा (दररंग कोच राज घराने का)
गाँव- होलीमोहनपुर, डाक- होलीमोहनपुर, थाना- मंगलदोई, जिल्ला- दररंग (असम), पिन- ७८४१२५, भारत
नमस्कार! आज दररंग राज घराने का सबसे प्राचीन दुर्गापूजा के बारे में कुछ जानकारी देने का प्रयाश करूँगा। साथ में इस राज घराने की बारे में भी थोड़ा सा आभाष देने की भी प्रयाश करूँगा।
दर्रांग जिला पहले दररंग राज्य था। यहा पर कोच राजा ने शासन किया था। इसी कोच राजा का राजधानी था मंगलदाई सहर से लग भाग 5 कि:मी: दुरि में होलीमोहनपुर नाम के एक प्राकृतिक रूपसे भरपूर खूबसूरत गाँव में हे, उसका वजूत आज भी मजुत हे। आज भी उस राज घराने का परिवार के लोग इस गाँव में सम्मान पूर्वक निबाश कर रहे हे।
ये दररंगी राज परिवारका सबसे पुराण दुर्गा पूजा है। आजभी ईसको दररंगी राज परिवार का राजधानी हौलिमोहनपुर में राजघराने का परम्परा के अनुसार मनाया जा रहा है। दररंगी राजा धर्मनारायण के शासन काल से मनाया गया इस पूजा का केइ बिसेस्ताई दिखा जाता हे।
👉 पूजा के लिए जो मूर्ती बनाया जाता हे वो लाल रंग की होना जरुरी हे।
👉 मूर्ती न होने से 'घट' स्थापित करके भी पूजा की जाती हे।
***** सप्तमी पूजा के कुछ खूबसूरत इमेज निसे देखा गया हे - सप्तमी पूजा के खास बात ये हे की उस दिन श्याम को चिरफल की पैर को पूजा कर के चिरफल को तोरा जाता हे। ये एक बिसेष पूजा हे।
👉 सब से पेहेले 'बेलकोईना' को पूजा की जाती हे। 'बेलकोईना' को बिसर्जन देने के बाद अस्टमी के दिन देवी पूजा होती हे।
👉 अष्ठमी के दिन बलि दिया जाता हे। उसदिन सिर्फ राज घराने की परिवार का ही प्रशाद देवी को सरया जाता हे।
👉 अष्ठमी के बाद अर्थात नवमी पूजा के दिनों से देवी बिसर्जन के दिनों तक राजपरिवार का कोई भी सदश्य पूजास्थल पर प्रबेश नही करता।
👉 राजपरिवार के अनुसार नवमी के दिन माँ दुर्गा कामाख्या का रूप धारण करता हे। कहा जाता हे की 'केन्दुकलाई' नाम का एक पुजारी ने जब माँ कामाख्या को पुज़ देते हे तो माँ प्रस्सन्न हो कर उसके सामने प्रकट होते हे। जब ये बात राजघराने का पुर्बापुरुष राजा नरनारायण को पता साला बो इन पुजारी के द्वारा माँ कामाख्या को जाग्रत रूप में देखने की कोसिस की थी। देवी ने ये बात जान कर पुजारी केन्दुकलाई का तुरंत छीर काट दिए, ओर इसी के कारन भयभीत हो कर राज परिवार का कोई भी लोग आजभी कामाख्या दर्शन नहीं करते।
👉 नवमी के दिन राज घराने का पूजा नही होती। उसदिन प्रजा तथा अभी स्थानीय लोग अपना प्रसाद देवी को सराते हे। नवमी के दिन राजपरिवार की तरफ से एक बकरी देवी के नाम पर बलि दिया जाता हे, ओर इस बली पुज़ारिओको भेट की जाती हे।
👉 बिजयादशमी के दिन अपराजिता पूजा समाप्त होने के बाद राजमहल में उनके पूर्बजो का अस्त्र-सस्त्र का पूजा की जाती हे। ये देखने लायक हे। इस पूजा को 'दर' पूजा केहेते हे। इस का बिधि अलग हे। निसे दर पूजा का सामान देखा गया ये सरे सामान सोना और रूपा (चाँदी) की हे।
![]() |
| दर पूजा का सामान |
निसे दररंगी कोच राज घराने का भवन हे। अब टूट रहा हे इस का निर्माण अति सुन्दर तरीके से कियागया था। इस का दरवज़ा और खिरकी का बनावट अद्भुत हे। यहाँ पर नई प्रजन्म को रीचर्स करने के लिये बहुतकुछ हे।
इस दररंगी कोच राजा का राजधानी होलीमोहनपुर और अस पास के गाँव में देखने के लायक बहुतकुछ हे। लेकिन समय के साथ और लोगोकी नसमज ने बहुत कृति चिन्हा धस की गई। अभी भी काफी सीजे हे जो बसाया जा सकता हे।
![]() |
| देवी बिसर्जन केलिए जा रहा हे |
अंत में ये आशा करता हु की इस दररंगी राज घराने की जो पुराणी स्मृति हे वो सरकार की तरफ से पूरी तरह संरक्षण करना बहुतही जरुरी हे। किउकी बहुत सारे स्मृतिया अभी तक नस्ट किये जा रहा हे तथा बे-दखल हो रहा हे । इस होलिमोहनपुर गाँव के अस पास की इलाके में बहुत सारे तलाव, जमीन, मंदिर, गढ़ (जहां सरोवर मिटटी से घेरा हुवा जमीन जहा 100 बीघा से भी ज्यादा ज़मीन होते हे) ये सब के बारे में थोड़ा सा भी खोलासा नहीं हुवा हे। मिडिया की तरफ से तो आज तक कोई प्रसार नहीं हुवा हे। इन सारि सिजो के बारे में प्रसार हो और पूरी दुनिया इसे देखे और साथ ही साथ दररंगी राज घराने का अतीत गरिमा भी आने वाले दिनों में अटूट रहे।
ॐ
















Post a Comment
Thank you for Visiting