Sipajhar, Darrang (Assam) India
नारिकली मंदिर
चिपाझर , दररंग (असम) भारत| Main Gate of Narikali Mandir |
नमस्कार ! दर्रांग जिला का एक प्रमुख आध्यात्मिक स्थल नारिकली मंदिर के बारे में कुछ जानकारी देने की प्रयास करता हु। ये मंदिर राष्ट्रीय मार्ग की किनारे में ही स्थित हे इसीलिए इस मंदिर को देख ने की स्वभाग्य सभी को होती हे।
गुहाटी से जाकर दररंग जिले के मंगलदाई सहर का 52 राष्ट्रीय मार्ग हो कर छिपाझर बासस्टैंड से 4 कि. मि. दक्षिण-पछिम दिशा मे ये मंदिर स्टीट है। स्थानीय लोगो के अनुसार आज से कई युगों से पेहले टुटा हुवा मंदिर का पत्थरोंको लेकर एक साधारण कुतिया बनाके लोगोंने पूजा पाथ कीया था। बर्तमान पीसले कुश बर्स से इस मंदिर का पुनर निर्माण हौ रहा है।
| प्राचीन मंदिर का ओबसेष |
मंदिरको पुनर निर्माण के समय में जो खोदाय हूबा था तब बहुत सारे पत्थर का मूर्तिया निकला था। ये पत्थर का मुर्तिया लगभग आहोम राज के समय का है। ये मंदिर कब प्रतिस्था हुबा था ईस का अन्दाजा नही लगाया जा सकता। लेकिन इतिहासबिदो के अनुसार इस मंदिर का निर्माण 10-12 शटिका निचित किया है।
ईन पत्थरो को देख कर ये भी कहा जाता हे की ये मंदिर पेहेले बोध लोगोका था। और ये मंदिर पत्थरों से निर्मित थे। कुल मिलाकर इस मंदिर को १००० (एक हजार) साल पुराने संस्कृतिक केंद्र और उपासना के स्थल के रूप में मना जा सकता हे। ये नारिकाली मंदिर का मुख्य बिग्रह हे शिवलिंग साथ में बिष्णु, गणेश और साथ में कार्तिके को भी पूजा किया जाता हे। यहां प्र्तेक दिन बहुत सरे भक्तो का भीड़ होता हे।
| Rest House |
| New Bhagawat Mandir |
मंदिर के दक्षिण दिसा में एक नया भगाबत मंदिर निर्माण किया गया हे। यहा पूजा के तरीका कुछ अलग हे।
| Bhagawat Mandir ke undar |
मंदिर में प्रतेक दिन पूजा-पाठ होते है। इस के अलबा शिबरात्रि का मेला बारे धूम धाम से मनाया जाता हे। इस मेले में काफी लोगो का भिर होता है।
नारिकाली मंदिर का खास बात ये हे की मंदिर की सामने स्थित राष्ट्रीय पथ से जाने बाले हर छोटे बोडे गाडिया किसीभी धर्म का हो मंदिर में कुछ दान करके ही जाते है।
अंत में ये आशा करता हु की दर्रांग गौरव ये नारिकली मंदिर दुनिया के सामने समक उठे और हमारी प्राचीन इतिहास का गरिमा अटूट रहे।
ऊ नमः शिवाय
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