Dahi Bhagwat Ashram
Vill- Kabikara, P.O. Janaramchowka, Dist- Darrang (Assam) Pin- 784529 , India
डाही भगवत आश्रम
गाँव- कबिकरा, डाक- जनरमचौक, जिल्ला- दर्रांग (असम), भारत पिन- 784529
मंगलदोई से लग भाग 10 -12 की. मि. के दुरी में जनरामचौक है। यहाँ से थोड़ी ही दूर शाकटोला नदी के दक्षिण पार में ये भागवत आश्रम स्थित है। ये गाँव बहुतही सुन्दर ओर ब्यबस्थित हे। आश्रम के साथ साथ Dahi H.S. School, Dahi College, Panchayat Office, Stodium ओर गाँव के अंदर एक New Haspital भी स्थापित हुबा हे। इस के अलावा आश्रम के पास ये सोटा सा नदिया, सारो ओउर पेड़-तृण से भरा हुबा एक शांत परिबेश यहाँ बिराज माँन है। जो यहाँ आकर ही मेहसूस किया जा सकता हे।




संन 1969 में स्थापित इस आश्रम के नाम 17 बीघा जमीन है। पहले इस में एक सोता था घर था। अब एक बड़ा सा मंदिर बनाया गया हे। यहाँ पर रोज भागवत पाठ होता है। और काफी भक्त लोग भी आता है। इस मंदिर में कोई भी बिग्रह नहीं हे। बिग्रह के बदले में यहाँ पर काफी पुराणी धर्म ग्रन्थ है। यहाँ का प्रधान ग्रन्थ भागवत ही हे। फिरभी एक प्राशीन स्थानीय "कोईथेली" भासा का "साचीपतिया" (घोखा) ग्रन्थ है। ये ग्रन्थ सिर्फ हर साल कति महीने की कृष्णाचतुर्दशी के दिन रात को ही पाठ किया जाता है। इस ग्रन्थ को हर कोई पाठ नहीं कर सकता। कोई एक या दो ही ब्यक्ति इसे पथ कर सकता है। अब इस का पाठक हे श्रीरबिन्द्र बोरादेब। इस भागवत आश्रम मंदिर का बार्षिक उतशव हे माँघिपूर्णिमा के दिन से टिन दिनों के लिये अखण्ड भागवत पाठ। इसी ३ दिनों में काफी लोगो का भीड़ होता है।




ये भागवत आश्रम मंदिर जिन महान लोगोने किसी खास उदेश्य आगे रख कर इस आश्रम को प्रतिष्ठा की हे इस का प्रभाव आने वाले समय में हमारा समाज के ऊपर निशित रूप से पड़ेगा। कियुकी भागवत एक जीवन सैली है। वर्तमान भाग-डोर जीवन में मनुष्य बिविन्ना समश्याओ से पीड़ित हे। मानव जीवन का हर कोई समश्या का समाधान इसी भागवत में मिलता है। एक सफल जीवन बीताने के लिए अध्यन करना बहुत जरुरी है। जीवन में जितनी बड़ा समश्या किउ ना हो यदि भागवत अतसी तरह से अध्यन या श्रवण किया जाता हे तो सबकुछ आसानी से समाधान किया जाता हे। इसीलिए भागवत ग्रन्थ का ज्ञान लेने से मानव जीवन महान, शांत और समृद्धि शाली होता है।
इसीलिए साल में सिर्फ एक बार इस भागवत पाठ में आकर अपना जीवन धन्य और समृद्धि शाली करने का सुबिधा इस भागवत आश्रम मंदिर ने मानव समाज को दिया है।
ॐ भागवती नमः
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