तामरेस्वर देवालय
गाँव- देउरियापारा, डाक- खोइरबरी, जिल्ला- उदालगुरी (बी.टी.कि.) असम, पिन- ७८४३२२, भारत
Vill- Deuriapara, P.O. Khoirabari, Dist- Udalguri (B.T.C.) Assam, PIN- 784522, India
परिचिति (Introduction) :
खोइराबारी रैल स्टेशन से 5-6 किलोमीटर ओर नामखोला से लग-भग 3-4 किलोमीटर दुरी में ये तामरेस्वर देवालय स्थित है। गांव का इलाका लेकिन रास्ते पक्का। रास्ते के दोनों तरफ खेत के मैदान ओर छोटा-बड़ा जलासय से भरा हुवा हे। ये ट्राईबल इलाका हे, यहाँका जदातर लोग बड़ो संप्रदाय के हे।
1. पुजारी - श्रीहेरम्ब शर्मा (पीसले 4 साल से)
2. प्रेजिडेंट- श्रीदिनेस्वर कलिता (पीसले 12 साल से)
3. सासिब- श्रीइंद्रा बड़ो (पीसले 12 साल से)
4. बर्तमान जमीन- 36 बीघा
5. एक तालाब- 7 बीघा का
6. कुछ बैल, बकरी ओर राज हनष भी हे।
उत्सव-अनुष्ठान (Festivel) :
1. अघोन महीने का पूर्णिमा तिथि में यहाँ पर शिवरात्रि बहुतही धूम धाम से मनाया जाता हे ओर काफी लोगो का भीर हटा हे।
2 . काटी महीने में पूरी महीना भगवत पाठ होता हे।
3. बोहाग महीने में बोध पूर्णिमा मनाया जाता हे।
4. बोहाग महीने का 5 -6 तारीख को दो दिन "देउल" उत्शव मनाया जाता हे।
इसके इलवा लोगो द्वारा नाम-कीर्तन किया जाता हे। यहां पर कोई बलि नही होता। कबूतर, बैल, बकरी अदि यहां चोर देने का नियम अभी भी साल रहा हे।
देवालय का परिबेश :
देवालय का परिबेश बहुत ही खूबसूरत हे। ये देवालय (1100-1200) ग्यारा बारवी शाटिका का हे। ये देवालय पत्थर ओर इत से निर्माण की गई थी. इसका प्रमाण बिभिन्न नक्काशी अंकित पत्थरों का भगनाओब्सेस यह सरोओर परा हुवा हे। समयके सलते हुवे प्राकृतिक कारणो से पुर्ब मंदिर टूट ने के बाद बर्तमान साधारण मंदिर बनाकर वही पूजा-पाठ कर रहा हे। अब देवालय का परिबेश बहुत ही खूबसूरत हे। सारो ओर नए-पुराणी बिभिन्न पैरो से भरा हुवा हे साथ ही काफी भगनाओब्सेस भी परा हुवा हे। प्रबेश द्वार के सामने बाएं तरफ सुन्दर नक्कासी तरासा हुवा एक बड़ासा पत्थर रखा हुवा हे। इस पत्थर के साथ ही असम सरकार द्वारा लिखा हुवा दो स्मारक हे। थोड़ी दूर जाते ही पूर्ब मंदिर का भगनाओब्सेस रखा हुवा हे। कुछ भगनाओब्सेस साधारण घर में भी रखा हुवा हे। मूल मंदिर के बाएं तरफ भी कुछ भगनाओब्सेस परा हुवा हे। मूल मंदिर के गर्भ गृह में शिबलिंग के साथ साथ सारोओर नक्कासी तरासा हुवा बड़ा बड़ा पत्थर, पत्थरो का मुर्तिया अदि रखा हुवा हे। यहीपर हर दिन पूजा दिये जाता हे।
*** मंदिर की दाएं तरफ लग-भाग 7 बीघा जमीन का एक बड़ा पुराणी तालाब हे। इसी तालाब का पानी से मंदिर का प्रशाद अदि धुंने का नियम हे। इस तालाब को "गाजिधौआ पुखुरी" कहा जाता हे।
*** बर्तमान इस तालाब में काफी सारा कमल खिल रहा हे।
*** तालाब के उत्तर दिशा में यानि मंदिर की उत्तर-पुब कोने में एक संग्रहालय ओर एक रेस्ट हाउस हे।
*** इसी संग्रहालय में पुर्ब मंदिर का काफी कीमती पत्थर रखा हुवा हे।
*** ये पत्थर देखने में बहुतही सुन्दर हे ओर यहाँ तरासा गया नक्कासी देखने लायक हे।
इतिहास (History) :
आज से लग-भाग 1000 साल पहले तामरेस्वर देवालय प्रतिस्थित हुवा था। लेकिन वर्तमान इसका भगनाओब्सेस ही देखा जाता हे। तामरेस्वर देवालय का लिखित तेथ, चित्र ओर पत्थरो में जो नक्कासी देखा जाता हे इस से पता सलता हे की किसी ज़माने में ये एक बहुतही बड़ा सांस्कृतिक केंद्र रहा था। इन पत्थरो को देख के ये प्रमाण होता हे की ये एक बहुतही बड़ा मंदिर का भगनाओब्सेस है। ये सब बहुतही उच्चस्तरीय भगनाओब्सेस हे। छोटे छोटे गणेश जी का मुत्री अंक्रित किये गया एक लंभा सा पत्थर पीसले 1980 चंग में असम राजिक संग्रहालय को दिया गया था।
तामरेस्वर देवालय के लिये अहोम राजा गौरीनाथ सिंह ने ताम्रपत्र द्वारा संग 1708 में 960 बीघा जमीन दान किया था। येही पर एक खास बात हे की तामरेस्वर ओर रुद्रेस्वर देवालय को दी गए ताम्रपत्र एक ही हे। जो अभी असम सर्कार का पुरातत्व बिभाग में संरक्षण कर रखा हुवा हे। इतना सारा जमीन दान देने की कारन से पता सालता हे की ये एक बहुतही बड़ा मंदिर था।
वर्तमान अध्यक्ष ओर मूल पुजारी के अनुसार पीसले 25-30 साल तक ये स्थान घाना जंगल से भरा हुवा था। पहले इस देवालय का मूल गर्भगृह बहुतही गभीर था ओर एहि पर शिबलिंग स्थापित थे।
इस देवालय का एक खास बात हे की कुछ साल पहले तक देवालय का गर्भगृह में पूजा के समय जो दूध, फूल, तुलशी दिए जाते हे वही रुद्रेस्वर देवालय के गर्भगृह में भी देखा जाता था. ओर रुद्रेस्वर देवालय में डाला गाया दूध, फूल, तुलशी तामरेस्वर में देखा जाता था। यानी ये दोनों देवालय के बीज किसी ज़माने में एक गभीर संपर्क रहा था। समय के साथ ये महान ब्यबस्था लुप्त हो गए। पहले ये देवालय दोलोई द्वारा सलया जाता था। वर्तमान दोलोई का ब्यबस्था नही हे।
समाप्ति :
तामरेस्वर देवालय में प्रबेश करते ही एक गभीर सन्नाटा अनुभव होता हे। ऐसा लगता हे की इस स्थान की हर तरफ काफी कुछ हे जो बहार आना सहता हे। मंदिर परिसलना कमिटी के अनुसार कुछ साल पहले सरकार की तरफ से यहां पर कुछ खोदाई की थी। खोदाई में काफी कुछ होने का पता भी साला था। लकिन खोदाई बांध कर दी। इसके बाद सरकार के तरफ से खोदाई करने की बात तो कहते हे लेकिन अभी तक खोदाई क्या नही। देवालय के सरोतरफ सरकार के तरफ वाल (wall) दिया गया हे। इस के इलावा इस देवालय के लिये करने की बहुत कुछ बाकी हे। पूर्ब से आज तक इस देवालय के साथ जोड़े हुवे लोग जैसे की दोलोई परिबार, देउरी परिबार, पुजारी परिबार से देवालय के बारे में ओर भी बहुत कुछ जानकारी मिल सकता हे। इन परिबार के लोग आज किस हल में हे इस को भी दुनिया के सामने लाया जाय तो देवालय के साथ बरसो से जोड़े रहने का एक उसित कीमत होगा। तामरेस्वर देवालय को दी गए ताम्रपत्र, दोलोई प्रथा, भग्नाबसेस अदि किसी बिसय पर आज तक कोई रिशर्च हुवा नही। नये पिरही के लोग इसके ऊपर रिशर्च करने से पुराणी दररंग राज्य के बारे में काफी कुछ जानकारी मिल सकता हे। सरकार की तरफ से जो खोदाई सुरु की गये थी वो भी अति सिगरे पूरा करे। ओर वहां छुपी हुई रहश्य उद्धार करके देवालय को पूर्ब की तरह एक बड़ा सांस्कृतिक केंद्र बनाकर समाज तथा विश्व के आगे दिखया जा सकता हे।
ॐ नमः शिवाय।
Thank you for exposing the hidden treasures of Assam.
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