Location :
Village- Padmajhar, P.O.- Tengera, Dist- Darrang (Assam) PIN- 784148, India
गांव- पद्मझर, डाक- टेंगरा, जिला- दररंग (असम) पिन- 784148, भारत
परिचय :
मंगलदाई सहर से लग-भाग 20 - 25 किलोमीटर पछिम दिशा में दीपिला नाम का एक गाँव शोरने के बाद दुनि नाम के एक इलाका में बूढ़ा गाँव पंचायत के अंदर पद्माझार नाम का एक गाँव में ये श्री श्री पोडमथान देवालय स्थित हे। इस गाँव में जाते ही पता सालता हे की ये गाँव कुछ सालतक घाना झंगल से भरा हुआ था। किउकी यहाँ लोगोका घर बहुतही काम हे। अभी भी मसली और कछुवे भरपूर मिलता हे। देवालय का मूल पूजा यहां स्थित एक बरा बटबृक्ष के निसे होता हे। बृक्ष के निसे एक छोटासा मंदिर हे। बर्तमान एक नया मंदिर बनने का काम हो रहा हे।
इस श्रीश्रीपद्माथान देवालय को 21 बीघा जमीन से घेरा हुवा हुवा हे। इस देवालय में सबसे महत्वपूर्ण मानाजाता हे यहां स्थित एक तालाब। इस तालाब को पदमपुखूरी नामसे जाना जाता हे। इसमें अब लग भाग 500 कछौआ और बहुतसारा मछलिओसे भरा हुवा हे। इस देवालय से जोड़ा हुबा ओर तीन अलग अलग तालाब हे। पुबदिशामे गाँवपुखुरी, पछिम दिशा में निजाम पुखुरी और दक्षिण दिशा में बैशा पुखुरी की नामसे जाना जाता हे। इस तालाबों में से बैशा पुखुरी अभी भी दरबानी हे। गाँव की लोग वहा बहुतहि काम जाता हे। इन तालाबों को कोब किसने खोदाई की थी इसका कोई जानकारी अभीतक नहीं हे। बर्तमान देवालय के सरोऔर पक्का वाल से घेराहुआ हे। पुबदिशामे एक सोतसा शिव मंदिर, सामने एक दानपात्र, एक रंगमच, एक प्रायमरी स्कूल, पद्माझार ऍम. ई. स्कूल, तालाब के किनारे एक कार्यालय, एक भोजनालय, एक भक्तो का निबाश हे। देवालय के दोनों तरफ दो सुन्दर गेट भी हे। इस देवालय का मुख्य पूजा हे देवीपद्मा पूजा यहा देवी का कोई बिग्रह नहीं हे। देवालय में ये पूजा सडिओसे सालता आ रहा हे।
यहा
दुर्गा पूजा भी बरी धूम-धामसे मनाया जाता हे। इस दुर्गापूजा में बहुत सरे
भक्तो का भीड़ होता हे। इस साल ये पूजा 99 साल पूरा किया। अब ये पूजा 100
साल पूरा करने जारहा हे। इसका लिखित जानकारी हे। इस देवालय का और एक बसिष्ठा हे की हरसाल पूजाके समय में कछुवे केहिसे उठ कर आना। पहले ज़माने में इसका संख्या बहुत ज्यादा था। बर्तमान ये काम हो गया हे। ये कछुवे कहासे आताहै इसका कोई पता नहीं चलता। इसतरह आने वाला कछुवे को पहले लोग पकड़ कर ले जाता था। इसीलिए पिछले कुछ सालोसे देवालय परिसलना समिति ने इन कछुवे को जीबित रखने के लिए प्रयास कर रहा हे। इस तरह आने वाला कछुवे को जो ब्यक्ति देवालय समिति की लोगो को समझा हे तो उन्हें बिसेष रूपसे सन्मानित किया जाता हे। इस तरह काफी कछुवे बसाया जारहा हे। उन लोगो का ये एक महान कारिय हे। इस तरह की कारीय केलिए नई प्रजन्म लोगो का कुचिश और आग्रह बिसेष रूपसे देखने लायक हे। बर्तमान युगका चिंताधरा के साथ ये एक अलग तरहके चिंताधरा हे। किउकी प्रकृतिका ये महान स्रस्ट्री कछुवे, मछली आदि आज हमारे कुछ गलतिओं के कारन लुप्त हो जा रहा हे।
इतिहास :
पद्मदेवी यानी माँ-मनसा यानी नागदेवी। माँ-मनसा देवी का बहुत सारा नमोमे से एक नाम हे माँ-पद्मदेवी। पद्मा अथबा माँ-मनसा देवी नागोंका अधिस्ठात्री हे। मनुष्य नाग ओर इस जैसा अखुरिक शक्तिया दूर भागाने के लिए यहा माँ-मनसादेवी को पूजा किया जाता हे। पुराणी कहावत के अनुसार ब्राह्मण ने सपनो के अनुसार तालाब के दक्षिण-पूरब की कोने में एक बटबृक्ष लगाकर पद्मादेवी का बेदी लगा कर पूजा की आयुजन किया। और तबसे इसी स्थान पर भोग, प्रसाद, कबूतर, अंडे, बकरी आदि देवी को अर्पण किया जा रहा हे। इस देवालय में बलि का बिधान नहीं हे। कबूतर, बकरी अदि देवी के नाम छोर दिया जाता हे। अनुमान होता हे की कुछ ज़माने से पहले यहा काफी गियानी लोगोका निबाश था यहां का सुन्दर तरीके से खोदाई किया हुवा तालाबों के साथ साथ इस गाँव का प्राकृतिक सौन्दर्य ओर सरो ओर जैववसिस्टा से भरा हुआ हे। इस देवालय में बैसाग ओर आखर महीने में श्रद्धालू का ज्यादा भीड़ होता हे।
Kanak Kalita, Bipul Kalita, Jintu Kalita |
समाप्त :
दरंग जिले का दिशा में स्थित ये पद्मा देवालय यहां का गौरव ओर पेशन हे। देवालय तथा इसका आस पास में स्थित तालाबों का सुन्दर्य, गाँव का प्राकृतिक दृश इसके अलेवा पद्मा तालाबों में भरा हुआ बिभिन्न मसली, कछुवे, पद्मा फूल के सौन्दर्य देखने की बाद एक सुकून मिलता हे। जो यहा अनेकी बाद ही अनुभाव किया जा सकता हे। बर्तमान ने मंदिरो का निर्माण हो रहा हे। फिर भी पुराणी बटबृक्ष के निसे रोज पूजा दिया जारहा हे। इस देवालय प्रचार के दिशा में काफी पीछे हे। यहा संरक्षन, उधार ओर प्रचार के लिए बहुत कुछ करने की बाकि हे। तालाबों में निकली नौका, पुराने ज़माने की डोला आदि देख कर ये अनुभव होता हे रिचार्च या खोदाई करने से काफी कुछ सामान निशीत रूप से पाया जा सकता हे। इसीलिए ने ज़माने का इस दिशा में आगे आना सहिये। स्कूल-कॉलेजों के द्वारा यहा पर अध्यन करने से भी देवालय का अतीत के बारे में बहुत सारा तथ्य जरूर पाया जा सकता हे। साथ साथ माँ-पद्मदेवी देवालय में जानेकी जो आनंद हे वो भी अनुभव कर सकता हे।
ॐ मनसे नमः
Val lagil. lagi thaka. aru pam buli akha krilo..
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