Location : Vill- Dhalpur Pahar, P.O. Dhalpur, P.S. Sipajhar (Dhalpur), Dis.- Darrang (Assam) PIN- 784145, India

गाँव - धलपुर पहर, डाक- धलपुर, थाना- सिपाझार (धलपुर ), जिल्ला- दररंग (असम), पिन- ७८४१४५, भारत 



नमस्कार ! आज में दर्रांग जिला का एक बहुतही प्राचीन तथा यहाँ का गौरव प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर धलपुर शिवमंदिर के बारे में कुछ जानकारी देने का प्रयाश करूँगा। 



परिसिटी (Introduction) : 

दररंग जिल्ला के छिपाझार घोड़ाबांधा से दक्षिण दिशाओ की आवर जानेके बाद गरुखोटी नाम का एक गाँव हे, यहाँ रूपहि चौक नाम का स्थान हे, जहां पे रोज बाजार होता हे। वहांसे ब्रह्मपुत्र के तरफ लग- भाग 25-30 किलोमीटर जानेके बाद ब्रह्मपुत्र से निकली एक सुन्दर जलधारा के पर में एक छोटासा पाहार हे। इसी पाहार में ढालपुर शिव मंदिर अवस्थित हे। इस मंदिर में जाना एक सुन्दर अनुभव हे। किउकी मूल रास्तेसे उतरने के बाद बिशाल ब्रह्मपुत्र की तरफ जाते हि हजार हजार बीघा जमीन, बिशाल सर इलाका, खेत, ब्रह्मपुत्र से निकली तीन अलग अलग जलधारा  पार होना एक सुन्दर अनुभव हे। इन तीन जलधारा में से पेहला और तीसरा में पानी हे इसीलिए लकड़ी अदि से बनाया हुवा पुलसे जाना हे। ये पुलभी देखनेको बहुत खूबसूरत हे। इस मंदिर तक इस रास्तेसे जानेकेलिए साईकल, मटर साइकिल या पैदल जाना होगा, दूसरी गारी जानेकी सुबिधा नहीं हे। मूल रास्ते से पेहला जलधारा पार होनेसे ढालपुर पहार तक इस बीज की रास्ते मे हजार हजार बीघा जमीन में बिभिन्न खेत और मुक्त खुली परिबेश प्रकृति का एक अपूर्ब रूप देखने को मिंलता हे। जो यहा अनेकी बाद ही अनुभव किया जा सकता हे।










इस तरह दो जलधारा पार होने के बाद तीसरा जलधारा पार होना परता हे। इस जलधारा में पानी ज्यादा हे यहां पर एक खूबसूरत लकड़िका पुल हे। इस पुल में एक रखवाला भी हे। वो यहां कारपेंटर का कामभी करता हे और इस पुल से आने जाने आलो से भरा लेता हे। वहा की लोगोका ये नियम हे। लेकिन मंदिर में जाने वाला लोगोसे भरा नहीं लेता। इस जलधारा पार होते ही धलपुर बाजार ठीक उसके बाद ही धलपुर पाहार अबस्थित हे। धलपुर बाजार के बीज मे से पछिम दिशा में थोड़ा जाने के बाद धलपुर पुलिस थाना और उसके बादही बाएं तरफ धलपुर पाहार सुरु होता हे। इसी ढलपुर नाम का छोटा सा पाहार में ही धलपुर शिव मंदिर स्थित हे। 

एक उल्लेखनीय बात हे की इस मंदिर में पिछले केई वर्षोसे एक बाबा रहताथा। इस बाबा ने ये मंदिर और आस पास के इलाके के बारे में काफी कुछ जनता था। दुर्भाग्य की बात हे की होम लोग जाने के 14 -15 दिन पहले इस बाबा का मृत्यु हुवा हे। बाबा का नस्वर दे मूल मंदिर के थोड़ा निसे में समाधिस्त किया गया हे। बाबा की मृत्यु के साथ ही ये मंदिर और इस इलाके की बारे में काफी कुछ जानकारी होमेसा होमेसा केलिए लुप्त हो गया। जिसके कारन होम कुछ जानकारी नहीं मिली। बाबा की आत्मा को शांति मिले। 








वर्त्तमान मंदिर का स्तिथि : 

पाहार के आरम्भ में दाई ओर पूर्ब मंदिर का भग्नाबसेस का एक भाग जमीन में स्थित देखा जाता हे। यहां से थोड़ा ऊपर उठने से ही मंदिर दिखा जाता हे। मंदिर की सारोऔर केंटो का तारोसे घेरा हुवा हे। मूल गेट पार होने के बाद थोड़ा जाते ही पूर्ब मंदिर का दो शिलास्तंभ खड़ा करके रखा हुवा हे। इस पर तेल, सिंदूर, दिया, अगरवत्ती जलाया हुवा हे। मंदिर के दाहिने तरफ पुजारी रहने का घर, पाने टैंक मध्य में बहुतही पुराणी चम्पा फूल का पेड़, एक पीपल के पेड़, कुछ बड़े पत्थर जिसमे कुछ नीसाण होने के प्रमाण हे। जहां सीमेंट लगाया हुआ हे। सायद वहां कुछ लिखा हुवा था जो टूट गया। यहां बहुत सारा बेल का पेड़ देखा जाता हे। 

मूल मंदिर बर्तमान तीनसे बनाया हुवा हे। अंदर एक प्राचीन नक्शा अंकित शिवलिंग हे। ये धलपुर पाहार बहुतही छोटा और खूबसूरत हे। इसका ऊचाई लग भग 15 -20 फुट से ज्यादा नहीं होगा। पाहार के मध्य में मूल मंदिर पूरब और पछिम दिशा में दो आंगन जैसा जगाह हे। पूरब दिशा में पेड़-पौधा से भरा हुवा हे। पछिम दिशा में पेड़ो के साथ साथ पत्थर से भरा हुवा हे। पत्थर से भरा हुवा इस स्थान के अंतिम भाग में स्थित एक बड़ा सा पत्थर में शतरंज खेलने का नक़्शा साथ में और एक अलग सा नक्शा स्थित हे। जिसको भीमर ढाल कहते हे। इसमें तेल दिया हुवा हे। ये दो नक्शा देखने लायक सुन्दर दृश्य हे। यहां से देखा जाता हे ब्रह्मपुत्र सर का हजार हजार जमीन का खुली अंचल तथा प्रकृति का एक अपूर्ब रूप।






इतिहास : 

पूर्ब कथा के अनुसार पाण्डवोने बनबास के समय कुछ दिन यहां निबाश करता था। पंडोवोने इस पाहार को उस ज़माने में अपने उपासना के लिये ब्यबहार किया, और शिवलिंग स्थापित करके  मंदिर का निर्माण किया। वर्त्तमान यहां स्थित पत्थर की स्तंभ और भग्नाबसेस से ये अनुमान लगाया जा सकता हे की ये मंदिर पथरोंसे निर्माण किया गया था। पाहार का मध्य भाग में मंदिर निर्माण करके पूजा-उपासना करने के साथ साथ पूरब और पछिम दिशा में स्थित स्थानों में उनलगोने सायेद बिभिन्ना कामो के लिये इस्तेमाल किया। पछिम दिशा की स्थान में सायेद खेल कूद के लिये इस्तेमाल किया था। इसीलिए यहां पत्थर के ऊपर उनलगोने शतरंज और करिओसे खेला गया ढाल का नक़्शा बनाया था। इसे भीम का ढल भी कहता हे ।






समाप्त : 

वर्त्तमान इस मंदिर का संरक्षण की बहुत ही जरुरत हे। टिनपाट से घेर दे कर मूल शिवलिंग रखा गया हे। जहा रोज पूजा दिया जा रहा हे। बहार रखा गया दनो शिलास्तंभ के पास पूर्ब मंदिर का कुछ भग्नाबसेस रखा हुवा हे। इन में भी रोज तेल, सिंदूर, दिया आदि दिया जा रहा हे। संरक्षण के नाम से मंदिर को सारो तरफ कांटा तारोसे घेरा हुवा हे। मंदिर तथा पाहार के आस पास कोई लोगोका घर-बार नहीं हे। 

पाहार के निसे एक पुलिस चौकी और एक बाजार हे। बंगला भासी मुस्लिम लोगोसे भरा हुवा इस अंचल का काफी दूर तक कोई हिन्दू लोग नहीं हे। पूर्ब बाबाका मृत्यु के बाद नया लोक नियुक्त किया गया हे। दर्रांग जिलाका गौरव इस मंदिर में सभी को एकबार दर्शन केलिए जरूर आये। 

ठंडी की मसूम में यहां आकर प्रकृति का अपरूप सौंदर्य अनुवब कर सकते हे। हजार हजार बीघा जमीन में किया गया खेत, उसकी खुसबू आपको एक नए स्वाद देगा। इतनी खुली इलाका सायद और कही भी देखने को नहीं मिलेगा। साथ में ब्रह्मपुत्र के अलग अलग जलधारा के अपरूप सौंदर्य। इसके इलवा मंदिर में स्थित बिभिन्ना भास्कर्य, पत्थर में बनाया हुवा शतरंज, ढाल आदि संरक्षण की वेबस्था के साथ साथ इस प्राचीन स्थानों के ऊपर उपयुक्त गबेषणा (रिचार्च) करना साहिये । 

उचित रिचार्च के द्वारा इस धलपुर पाहार यहां स्थित प्राचीन मंदिर और कृति चिन्ह समूहको दुनिया के सामने अगर लाया जा सकता हे तो यहां पर निश्चित ही एक पर्यटन का खेत्र के रूप में उभर आएगा। इसके साथ ही धलपुर पाहार, पथरोका स्तंभ, पथोरो में बनाया गया नकाशी, शतरंज, ढाल आदि दर्रांग बसी का स्वाभिमान के रूपमे संरक्षण करके पूरी दुनिया के सामने दिखाया जा सकता हे। 

अंत में आशा करता हु की ये खूबसूरत धलपुर पहर और प्राचीन धलपुर शिवमंदिर पूर्ब गरिमा के साथ पूरी विश्व में समक उठे। 

ॐ नमः शिबाई  

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