Vill- Dighirpar, P.O.- Dighirpar, P.S.- Mangaldai, Dist. Darrang (Assam), Pin- 784144, India

ढिघी पुखुरी

गाँव- ढिघीरपर, डाक- दिघीरपर, थाना- मंगलदाई, जिल्ला- दर्रांग (असम), पिन- ७८४१४४, भारत

परिचय :

दर्रांग जिल्लाके मंगलदाई सहर से पछिम दिशा में लग-भाग 11-12  किलोमीटर दुरी में दर्रांग जिल्ला का एक ऐतिहासिक स्थान हे दिघीरपार नाम के एक गाँव। इसी गाँव में इतिहास प्रसिद्ध राजा अरिमत्वा  के ज़माने का दीघिर पुखुरी नामका ये बृहत् तालाब स्थित हे। ये तालाब बहुतही प्राचीन और बिशाल था। एक जमने के बिशाल भूमि से घेरा हुआ ये बिशाल तालाब अब समय के साथ बिलिन हो गया। वर्तमान इस प्राचीन तालाब के निशाने की तरपर पछिम दिशा में तालाब का किनारे का कुछ भाग देखने केलिय बसा हुवा हे। लेकिन उसके उपरसे पक्का रास्ता निर्माण हुवा हे। फिरभी इस प्राचीन  किनारे को अचानी से पेहसना जाता हे। पूब दिशा में भी कुछ किनारे का अबशेष देखने को मिलता हे। वर्तमान इस तालाब के बिशाल भूमि पर सरकारी और सामाजिक बहुतसारे अनुस्थानो का निर्माण हुवा हे। 


इतिहास :

इस तालाब के साथ दुःख भरी कहानी जोड़ा हुवा हे। इतिहास के अनुशार इस बिशाल तलबको निर्माण या खोदाई के बाद पानी ना होने के कारन राजाने खोद देखा गया स्वप्न के अनुशार रानी कमलाकोवरी को तालाब में भेद के तरपर प्रदान किया था। तब जाके तालाब में पानी निकल आया। समय के गति सालते हुवे स्थानीय ननोई नाम का नदी के पानी ने इस बिशाल तालाब का पछिम दिशा की बिशाल किनारे को तोर कर तालाब को मिट्टीसे गार दिया था। तबसे ये तालाब झील या जंगल से भर गया और जंगली जानवर अदि का निबाश हो गया। 

*** जानकारों के अनुशार ये तालाब 11 या 12 शाटिका के बीज में खोदाई किया गया था। और 17 शाटिका में इस बिशाल तालाब को ननोई नामका नदी ने पछिम दिशा की बिशाल किनेरे को तौर कर यहाँ स्थित ज्वलदेवी को लेगया था। ऐसा लोगोके बीज प्रबाद हे।  


वर्तमान स्थिति :

समय के साथ साथ दीघिर पुखुरी के अंदर पूर्ब का जंगल, झील आदि हटा कर अब बहुतसारे अनुस्थान प्रतिस्थित हुवा हे उनमे से -
  1. Kamalakowari H.S. School
  2. Dighirpar H.S. School
  3. Kamalakowari M.V. School
  4. Dighirpar Fish Seed Farm (Fish Farmer's Dev. Agency) Darrang, Mangaldai.
  5. Dighirpar Rashlila Maydan.
  6. Community Hall
  7. 6-7 Extra big-small Pond.
  8. Public Samsan Ghat 
  9. 2 Nos. Mandir
इसके अलवा कुछ बेवसायिक प्रतिस्थान भी स्थापित हुवा हे। 




***  इस तालाब की जमीन में प्रतिस्थित शिक्षा अनुष्ठान समूह ने इस इलाके का शिक्षा के खेत्र में काफी महत्वा पूर्ण भूमिका निभा रहा हे। इन शिक्षा नुस्थानो के द्वारा समाज को बहुत लाभ हुवा हे। 


***  यहाँ स्थापित मंदिरो के साथ साथ रासलीला उत्सव ने समाजको आधात्मिकता के आवर ले जाने का होमेसा प्रयाश कर रहा हे। बिसेष रूप से यहा का रासलीला उत्सव जिसे दिघीरपर रासलीला के नामसे लोग  जानते हे। हरसाल यहा पर रासलीला उत्सव मनाया जाता हे। समग्र दर्रांग बसी लोगो के लिए ये दिघीरपर रासलीला उत्सव आध्यात्मिकता का एक प्रतिक हे। 


पछिम दिशा की बिशाल किनारे, अब इसे रास्ता  बना दिया 



Dighirpar Fish Seed Farm :

उल्लेख किया गया प्रतिस्थान समूह के अंदर यहाँ स्थापित सरकारी मछली के सीड उत्पादन केंद्र ने पूर्ब तालाब का ज्यादातर भूमि इस्तेमाल किया हे। पूर्ब तालाब के साथ आज के लोग जोड़ा रहे इसीलिए सायेद उत्तर दिशा में लग-भाग 40 बीघा जमीन में ये सरकारी मीन उत्पादन केन्द्र स्थापित हुवा हे। इस मीन उत्पादन केंद्र के अंदर 25 छोटे-बड़े तालाब हे। उस के अंदर मछली सीड उत्पादन का घर, सरकारी अबास आदि कई बिल्डिंग हे। 6 -7 सरकारी कर्मसारी नियुक्त इस सरकारी मीन उत्पादन केंद्र का वर्तमान हालत बहुतही नाजुक हे। मछली सीड पैदा करने वाला जो घर था वो सम्पूर्ण रूपसे ख़राब हुवा हे और कोई काम नहीं करता। यहाँ स्थित 25 तालाबों का मछली उत्पादन भी एकदम सिमित हे। यहाँ का करमसरी के अनुशार सालभर में लग-भाग 1 लाख का ही मछली उत्पादन होता हे। पूर्ब दिघीपुखूरी के बहुतसारे भूमि को इस्तेमाल किया हुवा ये मीन उत्पादन केंद्र को मछली त्पादन बृद्धि करने के साथ साथ इसे कार्यखम बनाना बहुतही जरुरी हो गया हे। इस मीन उत्पादन केंद्र से स्थानीय लोग तथा सरकारको अंततः कुछ लाभ मिले इसी तरह इसे कार्यखयम करना सहिये। किउकी 25 छोटे-बड़े तालाब, बहुतसारे बिल्डिंग, 6-7 अफ़ीचर- कर्मसारी से परिपूर्ण इस मीन उत्पादन केंद्र का काम-काज भी अंततः दर्रांग बसी लोगोकी ध्यान आकर्षित कर सके। 


स्थानिए लोग जो काफी जानकारी दी थी 

समाप्त :

इस दिघीपुखूरी के अंदर जो भी अनुस्थान प्रतिस्थित हुवा हे, सभी समाज के लिए अत्शा काम कर रहा हे। लेकिन जो सरकारी मीन उत्पादन केंद्र हे उसे सुधारना बहुत जरुरी हे। साथ में ये ऐतिहासिक दिघीपुखूरी के इतिहास स्थाई और मजबूत करने के लिए वर्तमान जो तालाब के किनारे बसा हुवा हे उसे संरक्षण करना साहये। साथ में पूर्ब तालाब का चित्र के साथ सभी उसकी बीसलेखन युक्त एक स्मारक निर्माण करने से आनेवाले दिनों में नए लोगो के लिए एक आदर्श बनकर रहेगा। और इसीतरह हमारा ये बिशाल दिघीपुखूरी का इतिहास दुनिया के सामने हमेशा अपनी गरिमा के साथ जिन्दा रहेगा। 
--- जोई तो दीघीरपुखूरी, जोई तो कमलाकोवारी --- 

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