Vill- Barkaliajhar, P.O.- Viyaspara, P.S.- Saipajhar, Dist. Darrang (Assam), Pin- 784, India
जोईपाल पुखुरी
गाँव- बोरकोलियझार, डाक- वियासपारा, थाना- सिपाझार, जिल्ला- दर्रांग (असम), पिन- ७८४ (भारत)
नमस्कार- आज में दर्रांग जिल्ला का एक सुपरिशित तालाबों के बारे में थोड़ासा बताने जा रहा हु। जिसका नाम हे जोईपाल पुखुरी यानि तालाब का नाम जोईपाल हे, किउकी यहाँका लोग तालाबों को पुखुरी बलता हे।
परिचय :
दर्रांग जिल्ला के सदर मंगलदाई सहर से पश्चिम दिशा में लग-भाग 14-15 किलोमीटर दुरी में छिपाझार-बरीचौक रास्ते के ठीक बीज में हे ये जोईपाल पुखुरी नाम का तालाब स्थित हे। इस गाँव का नाम बरकलियझार हे। (बर-कलिया-झार) मतलब बर- मतलब बड़ा, कलिया- मतलब काला, झार- मतलब जंगल यानि बहुत बड़ा काला जंगल। इसीसे अनुमान लगाया जा सकता हे की किसी ज़माने में ये स्थान घाना जंगल से भरा हुवा था।इतिहास :
दर्रांग जिल्ला के अंदर बहुत सारे प्राचीन तालाबों के अंदर इस जोईपाल पुखुरी सभी तरह की लगो के बीज परिचित, सन्मानिय तथा इतिहास प्रशिध एक ऐतिहासिक तालाब हे। यहाँ का पूर्ब राजा जोईपाल ने इस तालाब को खोदाई किया अथवा संरक्ष्ण किया था। इसीलिए इस तालाब का नाम जोईपाल पुखुरी हुवा। तालाब का खासियत ये हे की इसकी पानिभाग देखने लायक हे, पासके रास्ता, कृखी भूमि, गाँव इन सभी से तालाब का पानी भाग बहुत ऊपर रहता हे, और हमेसा ऐसेही रहता हे। पास की लोगो के अनुसार इस तालाब का पानी सालोसे ऐसेही रहा हे कभी भी कम या ज्यादा नहीं हुवा हे। इस तालाब में कमल भी फूलता हे, अभी नहीं हे। लेकिन एक गंभीर बात ये हे की तालाब का मध्य भाग में कमल नहीं खिलता तालाब का मध्य भाग हमेसा खली रहता हे। ये भी एक रहस्य हे। इस तालाब के साथ बहुत सारे इतिहास जोड़ा हुवा हे। तालाब के पास स्थानीय मुसलमानो का गाँव हे। लेकिन हिन्दू हो या मुसलमान सभी लोग इस तालाब को सम्मान देता हे। देखा जाता हे की सभी सम्प्रदाय के लोग इस तालाब का पानी प्रणाम करके भक्ति भाव से पिता हे। सभी दर्रांग जिल्ला बासी लोगोके बीज परिसित और सम्मानित इस जोईपाल पुखूरीके साथ बहुत सरे कहानी भी जोड़ा हुवा हे।
वर्तमान स्थिति :
वर्त्तमान तालाब के सारो किनारे में बिभिन्न अनुष्ठान-प्रतिष्ठान प्रतिष्ठित हुवा हे। पूब दिशा में पानी युगान केंद्र, गाँव। पछिम दिशा में रास्ता और कृखी भूमि। उत्तर दिशा में एक मजीद। दक्षिण दिशा में विद्यालय, पंचायत का दफ्तर और कुछ ब्यबसायिक प्रतिष्ठान स्थापित हुवा हे। पश्चिम दिशा में तालाब के वोर जाने का एक सीरी हे। तालाब का किनारे का कुछ कुछ भाग बुरी तरह टुटा भी हे।
समाप्त :
समग्र दर्रांग बासी लोगोके गौरव तथा श्रद्धा का ये तालाब संप्रीति तथा समन्वय का प्रतिक हे। इसीलिए तालाब का सारो किनारे पुनः निर्माण करके इसे संरक्षण करना बहुत जरुरी हे। इस से तालाब का सुन्दर्य और बढ़ेगा। साथ में तालाब के साथ जोड़ा हुवा इतिहास समूह खोज करके प्रकाश और प्रचार करने से जोईपाल पुखुरी के गरिमा के साथ साथ इस गाँव का भी प्रगति होगा।
*** आशा करता हु आनेवाले दिनोमे ये जोईपाल पुखुरी दुनिया के सामने समक उठे।
-- जोई तु जोईपाल पुखुरी, जोई तो बरकलियझार गाँव --
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