Vill- Begapara (Beghapara), P.O.- Barngaon, P.S.- Udalguri, Dist. Udalguri, B.T.A.D. (Assam),
Pin- 784509, India
देउलपुर देवालय या त्रिकाल भैरब मंदिर
गाँव- बैगापारा (बेघापारा), डाक- बरनागाओं, थाना- उदालगुरी, जिल्ला- उदालगुरी, बी. टी. ए. दी. (असम) पिन- ७८४५०९, भारत
परिसिटी :
अबिभक्त दररंग जिल्ला के उदालगुरी चाहर के दक्षिण दिशा में एक बहुतही भीतरी इलाके के गाँव में ये देउलपुर देवालय स्थित हे। इस गाँव का नाम बैगापारा या बेघापारा हे । इस देवालय जानेवाला रस्ते में लोगो के निबाश बहुतही काम हे। सरोओवर मुक्त कृषि भूमि ओर पैर पढ़ो से भरा हुवा एक संत-सुन्दर प्राकृतिक परिवेश बिराजमान हे। देवालय तक जाने का रास्ता पिस्ट संपूर्ण नया हे। इसीलिए वहा जाने की कोई असुबिधा नहीं हे। लकिन वहा ब्यक्तिगत गारी से ही जाना होगा दूसरा जातायत का सुबिधा अभीतक नहीं हुआ हे। देवालय के आसपास कोई भी लोगोका घर नहीं हे। लोगोका निबाश देवालय से काफी दुरी में हे। इसीलिए देवालय के सारोऔर संपूर्ण मुक्त हे। पास में छूटे छूटे दू छाई के बगीसे हे। पूब दिशा में एक बरसा तालाब और पश्चिम दिशा में एक सोता सा सुन्दर नदी बह रहा हे। जिसको बेगा नदी कह जाता हे। देवालय के बाये तरफ कुछ पुराने पैर भी हे। ये सभी मिलकर एक अपूर्ब प्राकृतिक सुन्दर्यै से भरा हुआ हे ये देवालय का परिबेश। देवालय से लग-भाग 1 किलोमीटर दुरी में एक गाँव हे। इस गाँव के पहेला घर ही देवालय का प्रधान संपादक का घर हे। इस गाँव में 80 घर लोगो का निबाश हे। इस गाँव में बड़ो, राभा, कोच, आदिबाशी अदि संप्रदाय लोगो का निबाश हे।
इतिहास :
पूर्ब इतिहास के अनुसार देवालय का 91 बीघा जमीन सं 1973 में सीलिंग एक्ट में छलागिया ऐसे कहा गया। वर्त्तमान 30 बीघा जमीन देवालय के नाम में हे। पूर्ब के अनुसार डोलोई का परम्परा इस देवालय में भी था। लेकिन अभी ये परम्परा नहीं हे। बताया गया हे की पूर्ब का सम्पति समूह सूरी हुआ हे। वर्तमान पूर्ब के सम्पति निसानेकी तरपर २-३ अजर हे। देवालय के अंदर लग-भाग 10 फुट गभीर 8 कोणयुक्त एक गर्भगृह स्थित हे। वहां शिवलिंग ओर टिशूल स्थापित हे। ये गर्भगृह दुर्गा पूजा के पहले पानी से भर जाता हे। दशमी पूजा के दिन वहां पूजा किया जाता हे, ओर अदभुत तरीके से पूजा करने की बाद ही पानी धीरे धीरे काम होने लगता हे ओर सुख जाता हे। बताया गया हे की बारिश के दिनों में भी वहां पानी नहीं होता हे। देवालय का ये एक गभीर रहस्य कहा जा सकता हे।उत्सव :
बैसाख (अप्रैल) महीने का 10 ओर 11 तारीख को इस देवालय का बार्षिक उत्शव पालन किया जाता हे। आस-पास के 5 गाँव के लोगोने मिलकर देवालय का इस बार्षिक उत्शव को मनाता हे। इस पांच गाँव को खेल के नाम से जाना जाता हे। इन पांच गाँव के लोग आकर देवालय में रहकर पूजा-पाठ करने का परम्परा पूर्ब से साला आ रहा हे। ये लोग इनदिनों वहा रहने-खाने की देवालय के उत्तर दिशा में एक लंबासा घर हे। इस पांच गाँव का नाम हे -
(1) बैगापारा (2 ) बगरीबारी
(3) दरंगीपारा (4) भोईरागुरी
(5) हाबिगाओं
इस देवालय के साथ बरो, राभा, कोच, आदिबाशी अदि संप्रदाय के लोग शामिल हे।
(1) बैगापारा (2 ) बगरीबारी
(3) दरंगीपारा (4) भोईरागुरी
(5) हाबिगाओं
इस देवालय के साथ बरो, राभा, कोच, आदिबाशी अदि संप्रदाय के लोग शामिल हे।
समाप्त :
प्रचार ओर प्रखार में ये देवालय भी बिलकुल अंधकार में हे। इस देवालय के बारे में भी कोई लिखित जानकारी मिला नहीं। देवालय के परिबेश बहुतही सुन्दर, संत ओर मुक्त हराभरा पैर-पढ़ो से भरा हुवा हे। सामने एक सोतासा नदी, खेत का जमीन ओर तालाब को देखने लायक हे। दूर दूर तक कोई भी लोगो का निबाश नहीं हे। यहां B.T.A.D. सरकारने रास्ता सुन्दर से बना दिया हे। लेकिन देवालय में सरकार की तरफ से कोई भी सहायता नहीं देखा गया। यहांतक देवालय नाम का एक भी साइनबोर्ड केहि भी नहीं देखा गया। महत्वपूर्ण बात ये हे की पांच गाँव के लोग एक साथ देवालय में रह कर पूजा करने का परम्परा को देख कर ये अनुमान लगाया जा सकता हे की पूर्ब में ये एक बहुतही उसे स्थान का देवालय हुवा करता था। समय के साथ साथ प्राकृतिक आपदा या अन्य करणबस धीरे धीरे ये स्थान अबहेलित होने लगा ओर वर्त्तमान ये एक नाजुक स्थिति में हे। इसीलिए इस देवालय को संरक्षित करने का बहुतही जरुरत हे। किउकी देवालय के साथ जोड़े सभी लोग बहुतही सहज ओर सरल हे। प्रशासन की तरफ से गुरुत्व ले कर इस देवालय को एक टूरिस्ट केंद्र के रूप में निर्माण कर सकता हे। किउकी सुट्टीया मानाने की ये एक बहुतही उत्तम आध्यात्मिक स्थान हे। देवालय का इतिहास की खोज करने केलिए स्कूल, कालेज के छात्र समाज को भी वहां जाना साहिए। मंगलदोई सहर से देवालय तक जाने का जो रास्ता हे बो भी बहुतही सुन्दर हे। रास्ते के दोनों तरफ प्राकृतिक सुन्दर्यै से भरपूर हे। इस देवालय में जा कर प्राकृतिक सुन्दर्यै का एक अपूर्ब आनंद का अनुभव लाभ कर सकता हे। इसिलए इस देवालय को संरक्षण करने के साथ साथ इसका प्रसार ओर प्रखार केलिए ससेतन समाज के लोग आगे आनेसे निश्चित हे ये देवालय पूरी दुनिया केलिए हमारा एक गौरव का कारन होगा।
।। ॐ देउलपुर देवालय नमः।।
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