Vill- Chamatia Para, P.O. Chamatia Para, P.S.- Sipajhar, Dist.- Darrang (Assam), PIN- 784147, India

पश्चिम मंगलदाई यौगिक हॉस्पिटल, महाविद्यालय और गवेषणा केंद्र

गाँव- चमटिया पारा, डाक- चमटिया पारा, थाना- सिपाझार, जिल्ला- दर्रांग (असम) पिन- ७८४१४७, भारत




नमस्कार ! आज दर्रांग जिल्लाका भीतरी गाँव में सं 1978 में स्थापित एक यौगिक हॉस्पिटल के साथ साथ इसकी प्रतिस्थापक तथा इस जिल्ला में सबसे पहले योग को प्रचार करने वाला योगाचार्य श्रीदंडप्रताप शर्मा देब के बारे में कुछ बताने जा रहा हु।  





परिचय :
दर्रांग जिलाके मंगलदाई  सहर से करीब 20 की: मि:  पश्चिम दिशा में ऐतिहासिक पथरीघाट के उत्तर दिशामे चमटिया पारा नाम का एक भीतरी गाँव में ये "Paschim Mangaldai Yogic Hospital, College & Research Centre" नाम का Yogic केंद्र स्थापित हे। वर्तमान 70 साल वर्षीय श्रीदंड प्रताप शर्माजी ने सं 1978 में एक महान उद्देश्य सामने रखते हुवे ये योगिक केन्द्र को खोद का भूमि दान दे कर स्थापित किया था। उस समय का युबक श्रीशर्मा जी पढ़ाई ख़तम होने के बाद सरकारी नकरी अदि के प्रति ध्यान ना देते हुवे योग के प्रति आकर्षित हुवे। इसी कारन भारत के योग साधक, गवेषक और योगिक हॉस्पिटल और यौगिक कॉलेज स्थापक स्वामी शिवानंद स्वरस्वती के पास योग शिक्षा प्राप्त की। स्वामीजी से योग शिक्षा प्राप्त करने के बाद योगोको ही जीवन का ब्रत मान कर स्वीकार किया। तब से पूरी दर्रांग जिल्ला में घर घर जा कर काफी मेहनत से योगिक पद्धति से लोगो की इलाज कर रहा हे और ये सेवा अभी भी जारी हे। आज से 41 साल पहले इस इलाके में योग के प्रति लोगोको आकर्षित करना उनकेलिए बहुत बरी सुनती था। 




***  उस समय में यहाँ की लोगोकी ओर से काफी समर्थन प्राप्त हुवा था। इसीलिए शर्माजी ने योगिक हस्पताल स्थापित करके लोगोको योग जैसा प्राकृतिक सिकित्षा के द्वारा रोग निबारण करने के साथ साथ योग शिक्षा के द्वारा समाज को शिक्षित करने की उद्देश्व से योग महाविद्यालय और योग शिक्षा को प्रचार और प्रखार केलिए गवेषणा केंद्र को प्रतिष्ठा किया। इस यौगिक केन्द्र के द्वारा यहाँ की लोगोको काफी फ़ायदा भी हुवा था। इस के एलोवा वो लोगोके घर घर जाकर रोगिवको इलाज करने के साथ समय समय में बिभिन्न स्थानों में बिशेष रूपसे गाँव के स्कूल, कॉलेज, संघ, मंदिर आदि सामाजिक स्थानों में योग के ऊपर योग सजकता शिबिर, निशुल्क योग प्रशिक्षण आदि अबतक आयोजित कर रहा हे। 


***  सहज, सरल, सात्विक तथा निज कर्म के प्रति सजक, धीर-स्थिर और सुदर्शन व्यक्ति श्रीदंडप्रताप शर्मा देव पीसले 41 साल से योग सिकित्सा के द्वारा बहुत सारे जटिल रोगिवको अभी तक आरोग्य किया हे। दर्रांग जिला के इलावा असम के बहुत सरे मरीज उनकी सिकित्सालय में इलाज करने केलिए आते हे। बिदेश से भी मरीज आकर उनके पास सिकित्सा ग्रहण करने का प्रमाण हे। 

*** योगाचार्य श्रीदंडप्रताप शर्मादेव सिकित्सा सेवा प्रदान के साथ साथ योग के ऊपर कुछ किताबे, गवेषणा पात्र प्रकाश करने के साथ अलग अलग अखबारों में भी बिभिन्न रोगोके ऊपर लेख प्रकाशित किया हे। साथमे Redio, or TV में भी उसके साथ बतसित प्रसारित होते रहते हे। 


SRI DANDA PRATAP SARMA'S FAMILY :

शर्मा देव का एक सुन्दर और सुखी संसार हे। उनके पत्नी,  3 पुत्र, 2 बहु, और पोता-पोती से भरपूर हे उसकी संसार। घरकी सभी लोग शर्माजी को पूरी तरह सहजोग करता हे। बिशेष रूपसे उनकी पत्नी सुरुवाती दिनसे पूर्ण सहजोग दे रहा हे। सिकित्साधीन रोगिवकी देखभाल, खाद्य आदि देने का एक सुन्दर ब्यबस्था उनकी पत्नी ने बरी मेहनत से कर रही हे। 




***  वर्तमान उनकी दूसरी पुत्र श्रीहिमालय शर्मा अपनी पिता की तरह वो भी योग शिक्षा ग्रहण किया और योग को ही अपनाया। अपने पिता के साथ अब वो भी योग की ऊपर काम कर रहा हे। अब जिल्ला के बिभिन्न स्थानों में अनुस्थित योग शिविर समूह में पिताके साथ वो ज्यादा हिस्सा लेता हे। हिमालय शर्मा ने वर्तमान योग की पाठ्यक्रम समूह बरी आतशी तरह साला रहा हे। एक सुबकता, सुदरसन युवक श्रीहिमालय शर्मा ने भी पिताकी तरह सरकारी नकरी आदि के तरफ आकर्षित ना होकर इस योग केंद्र में ही खुदको न्युजीत किया। वर्तमान समय की रंगीन दुनिया को चोर कर योग को प्रतिष्ठा करना और नव प्रजन्म की लोगोको योग के साथ जोड़ने केलिए उनके द्वारा किया गया ये प्रयास सच में प्रसंसा और प्रेरणा के योग्य हे। उनका भबिष्य उज्वल हो।

योग केन्द्र की कुछ प्रतिष्ठा कल के बारे में :

भारत वर्ष के पहले दर्जे की हठयोग साधक, गवेषक श्रीमद स्वामी शिवानंद स्वरस्वती देव ने सं 1929 में गुवाहाटी के उमाचल में योग केंद्र की स्थापना की। इसी योग गुरुके पास श्रीदंडप्रताप शर्मा ने 5 वर्ष योग शिक्षा ग्रहण की। योग शिक्षा सफलतासे समाप्त करनेके बाद स्थानीय लोगोके सहायता से मंगलदाई सहर में एक योगिक केंद्र प्रतिष्ठा के लिए प्रयास किया था। उस समय में योग शिक्षा का प्रचार और जानकारी लोगोके बीज बिलकुल नहीं थे। फिरभी यहा का कुछ समाज ससेतं व्यक्ति ने इसतरह का एक योग केंद्र का प्रयोजन अनुभव की। इसीतरह सं 1976 के 29 अगस्त में मंगलदाई सहर में योग के ऊपर पहली बार एक सभा का आयोजन किया और इसके बाद ही मंगलदाई सहर में योग केंद्र का प्रतिष्ठा किया गया था। इस केंद्र में आनेवाले लोगोका उत्सा और योगदान देख कर इसकी परिषर बृद्धि करने केलिए दर्रांग जिला के कुछ व्यक्ति को लेकर सं 1977 के 28 सेप्टेम्बर में दूसरी बार योग की ऊपर सभा की अनुस्थित किया गया था। उस सभा में मुख्य आकर्षण तथा बिशेष अतिथि के रूप में श्रीमद स्वामी शिवानंद स्वरस्वती देव खुद उपस्थित थे।

***  इस यौगिक केंद्र को प्रतिष्ठा केलिए सं 1978 में सरकार की तरफ से मंगलदाई सहर के अंदर छपाई नाम के इलाके में 2 बीघा सरकारी जमीन दिया गया था। लेकिन कोई आर्थिक सहायता ना होने के साथ साथ उनको काफी समश्यावो का सामना करना परा। और इसिलए मंगलदाई सहर से 20 की: मि: पश्चिम दिशा में स्थित चमटिया पारा गाँव में अपना खोद की जमीन में साधारण तरीके से गृह निर्माण करके पहले 5 और बाद में 15 बिसना युक्त इस महान योग केंद्र को स्थापित किया था। 




वर्तमान समय में योग का गुरुत्व :
वर्तमान योग चिकित्सा और योग शिक्षा के फायदे को देखकर इसके ऊपर बिशेष रूपसे गुरुत्वा दिया गया हे। किउकी यौगिक चिकित्सा पद्धति के द्वारा जटिल से जटिल रोगोका भी बिना ओषधि और बिना ऑपरेशन से इलाज किया जाता हे। योग शिक्षा ग्रहण करने से शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक बिकाश  होता हे।  भारत बर्ष का ये प्राचीन योग विद्या दुनिया की अलग अलग देशोंने अपनाया और इसका काफी लाभ भी उठाया हे। वर्तमान हमारे लिए गौरव का बात हे की भारत के प्रधान मंत्री महामान्य श्रीनरेंद्र मोदी देव की प्रयास से विश्व का 199 देशो ने योगविद्या को अपनाया हे। इसके अलावा खुसी की बात तो ये हे की सं 2015 वर्ष से हर साल 21 जून तारीख को अंतरास्ट्रीय योग दिवस की रूप में मानाने की सिद्धांत ने पूरी भारत बसी का गौरव दुनिया में और कई गुना बढ़ गया हे। 


***  असमबाशी  केलिए भी  खुस खबरि ये हे की वर्तमान राज्य सरकार ने प्रायमरी से लेकर महाविद्यालय तक योग शिक्षक नियुक्ति का फैसला किया हे। इससे नए परजन्म के लोगोके लिए मंगलमई करिया के रूप में सिद्ध होगा। लेकिन योगविद्या के साथ साथ उसित खाद्य, नशीली प्रदार्थ के बुरा प्रभाव और निति शिक्षा के बारे में भी लोगो को ज्ञान देना जरुरी होगा। 

वर्तमान स्थिति :
वर्तमान इस यौगिक केंद्र का हालत बहुतही नाजुक हे। रोगी रखने केलिए अब कोई घर नहीं हे। पहले का घर सब टूट गया हे। एक कार्यालय गृह उसने निर्माण करके वोहि से अब सारा काम सलया जा रहा हे। वर्तमान सन्मुख भाग में लोगोकी सहायता से एक दूसरा घर आधा निर्माण की अवस्था में हे। ये घर सम्पूर्ण निर्माण होने की बाद ही सायेद पुनः रोगी यहाँ रखने की व्यवस्था कर पाएगा। सिकित्सालय में रखा गया रोगी को बहार का खाना खानेकी अनुमति नहीं हे। खाना उसकी तरप से दिया जाता हे। इसकेलिए थोड़ा पैसा लिया जाता हे। 


***  वर्तमान यहाँ मरीजों की इलाज के साथ साथ चार्टिफिकेटे, डिप्लोमा, अदि कई तरह की योग की ऊपर पाठ्यक्रम सलया जा रहा हे। ये पाठ्यक्रम समाज के सभीकेलिए खोला हे। इन पाठ्यक्रम समूहकी माद्यम से योग का शिक्षा लेकर खोद के साथ साथ अपना परिबार को भी रोगमुक्त करके रख सकता हे। योग के साथ साथ लोगोकी खाद्य की बारे में भी इस केंद्र ने विशेष ध्यान देता हे। योग और खाद्य अभ्यास से ही वर्तमान समाज में फैला हुवा जटिल से जटिल रोगो से बसने की एकमात्र उपाय हे। योग अभ्यास के द्वारा शरीर और मन आनंदित रख सकता हे। हम अपना खोद की शरीर के बारे में कुछ नहीं जानते अथवा जाने की प्रयास भी नहीं करते। लेकिन प्रकृति का ये अमूल्य उपहार मानव शरीर की बारेमे हम थोड़ा सा भी जानना बहुत जरुरी हे। तभी हम जीवन का प्रकृत सुख अनुभव कर सकते हे। इस शरीर के बारे मे जानने की एकमात्र उपाय हे योग। 


समाप्त :
वर्तमान सर्कार की तरफ से इस केंद्र को थोड़ा ध्यान देना बहुत जरुरी हे।आज तक इस योगिक केंद्र को काफी प्रयास करने की बाबजूद कोई सरकारी सहायता नहीं मिले। कोई सरकारी या गैरसरकारी आर्थिक अनुदान ना मिलने की बाबजूद इस केंद्र ने योग जैसा प्राकृतिक चिकित्सा और योग शिक्षा की एक शक्तिशाली परिबेश इस इलाके में पकड़ कर रखा हे। इस केंद्र को सलाने वाला श्री दंड प्रताप शर्मा देव पीसले 41 वर्ष का जो अभिज्ञता और अनुभव हमारे समाज केलिए बहुतही मूल्यवान हे। इतनी वर्षो में विभिन्न रोगी को इलाज करके जो अभिज्ञता और अनुभव उसको मिला हे इसका लाभ हम सभीको लेना साहिए। बिना दवा और बिना ऑपरेशन से जटिल रोगोका इलाज करने वाला इस योगिक चिकित्सा पद्यति को ग्रहण करना हम सभी केलिए लाभ दायक हे। हम सभी प्रकार की योगिक चिकिस्ता और योग शिक्षा इस केंद्र से ले सकते हे। साथ में इस केंद्र में योग का शिक्षा लेकर एक रोग मुक्त और आनंदित जीवन लाभ कर सकते हे। 


***  आशा करता हु, आनेवाला दिनोमे ये Pachim Mangaldai Yogic Hospital, College and Resourch Centre अधिक कार्यखयम हो और समाज के लोगोको बिना दवा और बिना ऑपरेशन से रोगमुक्त आनंदित जीवन देने की प्रयास को जारी रखे। और श्री दंड प्रताप शर्मा तथा उनका ये योगिक केंद्र दुनिया के आगे नए रूपसे चमके। 

*** धन्य हे श्री दंड प्रताप शर्मा और आपका ये जीवन भर का प्रयास। 

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