Location : Vill- Kumarpara, P.O. Deomornoi, P.S. Mangaldai, Dist- Darrang (Assam), PIN- 784147, India गाँव- कुमारपारा, डाक- देवमोरनोई, जिल्ला- दररंग (असम), पिन- ७८४१४७, भारत |
नमस्कार ! आज दरंग जिला के एक बहुतही प्राचीन आध्यात्मिक केंद्र श्रीश्री शियाला वैष्णव देवमोरनोई सत्र के बारे में कुछ जानकारी देने का प्रयाश करूँगा।
परिचय :
दरंग जिला के सदर मंगलदाई सहर की पछिम-उत्तर दिशा कोने में लगभग 20-22 किलोमीटर दुरी में ऐतिहासिक इलाका देवमोरनोई नाम का एक बहुतही प्राचीन मैथ-मंदिरो से भरा हुआ इलाका हे। इस देवमोरनोई चौक के उत्तर दिशा के और लगभग आधा किलोमीटर की दुरी में ये श्रीश्री शियाला वैष्णव देवमोरनोई सत्र स्थित हे। इस सत्र के सरोऔर का परिबेश प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर हे। यहाँ हरदिन बिविन्न स्थानों से भक्त आते हे और प्रशाद सरता हे। इस सत्र में शरण-भजन आदिका भी सम्पूर्ण बेवस्था हे।
*** स्थापित : ये सत्र बहुतही प्राचीन बताया जाता हे की ये श्रीमंत शंकर देव के समय से भी पहले का हे।
*** प्रतिष्ठता : श्रीश्री सम्बत्सर देवगोश्वामि (जो आगे जा के शियाला वैष्णव नाम पाया), पिता- धर्मदेव गोस्वामी।
*** संहती : ये सत्र ब्रह्मसंहति के अनुसार सालता हे।
*** सम्पति : वर्तमान सत्र के नाम पर 17 बीघा 3 काठा जमीन हे।
*** इस शिला वैष्णव सत्र का मंदिर गृह मिटटी और बॉस से निर्माण किया हुआ हे।
*** मंदिर की मणिकूट के अंदर गुरु आसन में गुणमाला नाम का एक प्राचीन ग्रन्थ स्थापित किया हुवा हे।
*** इस सत्र में शरण-भजन की प्रक्रिया सम्पूर्ण पुथिनेचिया पन्था के अनुसार होता हे।
*** पुजारी : श्रीशचीन्द्र भट्टाचार्य अपने पीसले 15 वर्ष से इस सत्र केलिए अपना योगदान दे रहे हे।
*** बिसेष रूप से इस सत्र प्रतिष्ठापक सम्बतसर देव गोस्वामी या श्रीश्री शियाला वैषणव के बाद उनकी खंडन के लोग पूरी 8 पीढ़ी तक इस सत्र को संभाला था। लेकिन इसके बाद वर्तमान इस खंडन के लोग निष्क्रिय हे।
इतिहास :
इस श्रीश्री शियाला वैष्णव देवमोरनोई सत्र के इतिहास बहुतही प्राचीन हे। उसके बारे में सत्र संचलाव कमिटी ने एक छोटा से पुस्तक प्रकाशित किया हे। उस छोटासा पुस्तिका में सत्र प्रतिष्ठा और शियाला वैष्णव जन्म के साथ जोड़ा हुवा सभी बाटे विस्तार से लिखा हुवा हे। इस पुस्तक का मूल भाव असा हे की - उस समय में धर्मदेव गोस्वामी की छोटी पत्नी की गर्भ में एक पुत्र का जन्म हुवा था, लेकिन अपनों ने ही धोखे से मृत पुत्र बोलकर इस संतान को देवमोरनोई नदी के झर में फेक दिया था। कुछ सालो बाद धर्मदेव ने नदी के किनारे कुछ लोमड़ी (यहां के लोग लोमड़ी को शियाल बोलते हे) की बच्चे के बीज खेल रहा एक छोटा सा मनुष्य बालक को देख लेता हे। तब धर्म देव ने अपने पुत्र को पेहसन लेता हे और उसे घर ले आता हे। और पिता धर्म देव ने उस बालक को सम्बत्सर देव गोस्वामी नाम देता हे। लेकिन वो लोमड़ी के साथ ही पला-बड़ा होने के कारन नदी के किनारे में ही आश्रम बनाके रहने लगा।
** उस समय का पाल बंश के राजा ने श्रीसम्बत्सर देव गोस्वामी का जन्म रहस्य और उनका महात्या देख कर उसे श्रीश्रीशियाला वैष्णव नाम दे कर बहुत सारे जमीन जायदात दान दिया था। उन के बाद इस सत्र को इसी खंडन को लोगोकी द्वारा हे सलया जा रा था लेकिन ८ पीढ़ी के बाद ये खंडन निष्क्रिय हो जाता हे। वर्तमान स्थानीय सत्र संचालन कमिटी ने पुजारी नियोग कर के इस श्रीश्री शियाला वैषणव देवमोरनोई सत्र को सक्रीय बनाकर रखा हे। इस प्रकार यहाँ हर दिन पूजा-पाठ होता हे, बिभिन्न स्थानों से भक्त आता हे और प्रशाद सराय जाता हे।
उत्सव :
इस श्रीश्री शियाला वैष्णव देवमोरनोई सत्र के बार्षिक उत्सव इस प्रकार के हे
1 . बैशाख महीना के 9 तारीख को देउल उत्सव मनाया जाता हे।
2 . माघ महीने का पूर्णिमा तिथि में श्रीश्री शियाला वैष्ण्ब देव का जन्म तिथि मनाया जाता हे।
3 . जेठ महिनी का पूर्णिमा तिथि मनाया जाता हे।
4 . भादो महिनी में श्रीकृष्ण जन्माष्ठमी उत्सव और कोई भक्त सही तो भोग दे सकते हे।
5 . आश्विन महीने में श्रीमंत शंकरदेव का जन्म तिथि मनाया जाता हे।
6 . कार्तिक महीने का पूर्णिमा तिथि और
7 . अगहन महीने का पूर्णिमा तिथि मनाया जाता हे।
| Pujari (Mahanta) Sri Sachindra Bhattacharya, devoted last 15 years |
पुजारी या देउरी :
** इस शियाला वैष्णव सत्र के पुजारी देउरी या महंत के नामसे जाना जाता हे। इसने हरदिन पूजा-पाठ करने के साथ साथ यहाँ आनेवाला भक्तो से सत्र के बारे में पूरी जानकारी देते हे। साथ में मंदिर का प्रशाद बितरण अदि सारा काम खोद करते हे। अस-पास की कुछ गाँव की लोग भी इस काम में उनको सहयोग करते हे। इसके अलवा इस्सुक भक्तो को ये सत्र प्रतिष्ठा काल से ले कर वर्तमान अवस्ता तक ब्याख्यान करते हे।
** सबसे महत्पूर्ण बात ये हे की इस देउरी या पुजारी ने एक बहुतही कठिन जीवन शैली अपना कर सलना परता हे। ये नियम बहुतही कठिन हे। किउकी सत्र के नियम अनुसार पुजारी ने किसी और की बनाया हुवा खाना नहीं खा सकता। इस तरह की और कई नियमोंकी बीज पुजारी या देउरी श्रीशशींद्र भट्टाचार्य देव ने पीसले 15 वर्ष से इस शियाला वैष्णव सत्र को संभालता हुवा हर दिन अपना योगदान दे रहा हे। उन्होंने पुथिनेचिया संत समाज के अंदर यहाँ लोगोको शरण-भजन देनेका काम भी संभालता हे।
** पुजारी श्रीशशींद्र भट्टाचर्य देव का ये निष्ठा और त्याग बहुतही प्रसंशनीय और हमारे लिए प्रेरणा का श्रोत हे। कोई भी एक कार्य पर खुदको अर्पण करना एक महान कार्य हे। पीसले 15 सालो से इस शियाला वैष्णव सत्र के प्रति उनका ये निःस्वार्थ सेवा समाज साथ आनेवाला नई पीढ़ी केलिए एक आदर्श और प्रेरणा होगा। आनेवाला दिनों में आप और अधिक कार्याख्याम बने साथ में ये श्रीश्री शियाला वैष्णव देवमोरनोई सत्र को एक उच्च आध्यात्मिक केंद्र के रूप में चमकाई।
वर्तमान स्थिति :
** श्रीश्री शियाला वैष्णव देवमोरनोई सत्र के दायरे में 17 बीघा 3 कथा जमीन से घेरा हुवा हे। मूल मंदिर गृह के निसे के भाग मिटटी और ऊपर की भाग बांस से बनाया हुवा हे। देखनेसे प्राचीन आश्रम का एक चित्र मन में आता हे। सत्र के डेयरी के अंदर थोड़ा खेत, एक बरसा तालाब और कुछ पेड़ भी हे। इस के अलावा सत्र के सरोवर का परिबेश बहुतही सुन्दर और खूबसूरत हे। एक मधुर सन्नाटा यहाँ पर होमेछा बिराजमान हे। मंदिर गृह के दाईं तरफ भराल गृह, सामने एक भक्तो का बैठना का गृह, लेट्रिन-पाथरूम आदिका सुबिधा हे। सत्र के सरोवर कुछ दिनों तक मुक्त था। लेकिन वर्तमान असम सरकार की तरफ से असम दर्शन योजना के तेहत कुछ अनुदान प्राप्त होने के बाद सरोवर का वाल देने का काम लग भाग सम्पूर्ण हुवा हे। प्रबेश पथ में एक सुन्दर गेट का निर्माण किया गया हे।
** कुछ साल पहले टोक ये स्थान नदी के साथ जंगल से भरा हुवा था। अभीभी सत्र के आस-पास लोगो का आबादी बहुतही काम हे। आस-पास की परिबेश को ध्यान से देख ने से पहले ज़माने की सन्नाटा और एक भब्य परिबेश अनुभव किया जा सकता हे। श्रीश्री शियाला वैष्णव सत्र के आस-पास वर्तमान स्कूल, कॉलेज, कुछ सरकारी दफ्तर अदि सुन्दर रूप से स्थापित हुवा हे। इस सत्र के थोड़ी सी दुरी में एक सरकारी एड़ी बीज उत्पादन केंद्र (GOVT. ERI SEED GRAINAGE) नाम का विशाल सरकारी ऐरी फार्म हे। लग-भाग 100 बीघा जमीन का ये फार्म भी बहुत खूबसूरत हे। हजारो की तादात में ऐरी पेड़ो से भरा होवा और इस खिलता होवा बिभिन्न पक्षिओ की आवाज ने मनको लोभता हे। इस सत्रको दर्शन करने के साथ साथ इस ऐरी फार्म को देखना सहिये आपको आनंद मिलेगा।
समाप्ति :
** श्रीश्री शियाला वैष्णव देवमोरनोई सत्र प्रसार और प्रचार और प्रसार के बारे में कुछ हॉट तक यहाँ के दूसरे आध्यात्मिक केंद्र से थोड़ा आगे हे। फिरभी प्रचार और प्रसार के दिशा में करने केलिए और बहुत कुछ हे। गवर्नमेंट के तरफ से दिए गए अनुदान के प्रति देखा जाय तो ये शियाला वैष्णव सत्र कुछ हट तक संरक्षित हे। फिरभी इसे आतशी तरह संरक्षण करना बहुत जरुरी हे। प्रचार की संदर्व में देखा जाए तो एक छोटासा पुस्तिका प्रकाशित किया हुवा हे। लेकिन ये पुस्तिका भी अब मंदिर में मजुत नहीं हे।
** इस श्रीश्री शियाला वैष्णव देवमोरनोई सत्र के बारे में एक सम्पूर्ण इतिहास प्रकाश करना बहुतही जरुरी हे। यहाँ का भक्त समाज इस सत्र का प्राचीन इतिहास रिसर्च के द्वारा खोज करने केलिए और आध्यात्मिकता के प्रति नए पीढ़ी के लोगोको आकर्षित करने की प्रयाश करे।
** अंत में ये आशा रखता हु की ये श्रीश्री शियाला वैष्णव देवमोरनोई सत्र का महान लक्ष्य और उदेश्य आनेवाला दिनों में पूरी समाज के आगे उजागर हो और ये श्रीश्री शियाला वैष्णव देवमोरनोई सत्र बिश्व के आगे चमक उठे।
ॐ श्रीश्री शियाला वैष्णव देवमोरनोई सत्र नमः
Post a Comment
Thank you for Visiting