Sri Phuleswar Deka, Artist
Vill- Medhipara, P.O. Chapai, P.S. Mangaldai, Dist.- Darrang (Assam), PIN- 784529, India
श्रीफुलेस्वर डेका
गाँव - मेढ़ीपारा, डाक- छपाई, थाना- मंगलदोई, जिल्ला- दर्रांग (असम ), पिन- ७८४५२९, भारत
Introduction :
दर्रांग जिल्ला के मुख्य चाहर मंगलदाई के बिलकुल करीब लग भाग 2 -3 किलोमीटर दुरी में मेढ़ीपारा नामका एक गाँव में श्री फुलेस्वर डेका नामका एक ब्यक्ति ने खोदकी प्रयास से लकड़िओ में मूर्ति बनाने का एक उद्योग स्थापित करने की प्रयास कर रहा हे। उन्होने किसी तरह की प्रशिक्षण लिए बिना ये काम कर रहा हे। उसने सं 1995 में इस काम को आरम्भ किया था लेकिन रोजगार की तलाश में ब्यस्त रहने के कारन इसे कर नहीं पाई। उसके बाद सं 2000 में से इस शिल्पकर्म में पूरी तरह अपने आपको नियोजित कर रहा हे। अब इस शिल्पकर्म के दोवारा काफी राष्ट्रीय - अंतरास्ट्रीय प्रदर्शनी में भाग लेने की सौभाग्य प्राप्त किया । आर्थिक दुरबस्ता के कारन ऋण ले कर टिनपाटसे एक सलिया बनाकर इसी घर में अब ये अपना काम कर रहा हे।



दो संतान और पत्नी के साथ उसका एक सुखी संसार भी हे। पत्नी श्री दीपिका डेका एक सुगृहिणी होनेकी साथ साथ आतशी तरह कपड़ा बुनना भी जानती हे। कपड़ा बन कर अपने पतिको कुछ आर्थिक लाभ देने के साथ साथ उसकी काम में भी पूरीतरह सहयोग करते हे। उनकी द्वारा निर्माण किया हुआ कुछ खास हे - गुरुर असना, असम के गढ़, बहुत सारे मुर्तिया, हिरन, मोर, असम के मानचित्र, कामाख्या मंदिर, रंगघर, अदि सभी तरह की सीजे निर्माण कर रहा हे। बचपन से गरीबी से जुस्ता हुवा श्रीदेका अपनी पढ़ाई हायर सेकन्डे पास करने के बाद और आगेकी पढ़ाई नहीं कर पाय। आर्थिक आभाव होनेके कारण बो बिभिन्न स्थानों में नकरी की लेकिन सफल नहीं हुवे। बादमे उसकी अपनी अंदर सुपी प्रतिभा ने उसे फिर वापस ले आया और लकड़िओ में अपना भाग्य निर्माण करने केलिए आगे बढ़े।

बर्तमान युगो में लकड़ी की मुर्तिया बनाकर जीबन सालाना बहुत ही मुश्किल काम हे। लेकिन आदमी अगर कुछ करने की थान लेता हे तो कोई भी कामो में अपना भग्य बना सकता हे। उसके साथ साथ दुनिया में खोद की एक अलग पेशन भी। बर्तमान नये पीढ़ीके लोग इस तरह की शिल्पा कर्म के प्रति जारसीभी आग्रह नहीं हे। लेकिन श्रीडेका इस नजरिए से कुछ अलग हे। किउकी बर्तमान युगो में इसतरह की शिल्पसमुह लुप्त हो रहा हे। जिसको उन्होंने जिन्दा रखने की अपनी तरह से भरपूर कुचिस कर रहा हे।

श्रफुलेस्वर डेका दोवारा निर्मित भास्कर्य समूह दरंग जिल्ला के सभी अनुष्ठान-प्रतिष्ठान के अलावा असम के सभी अनुष्ठानो में प्रदर्शन किया गया हे। साथ साथ राष्ट्रीय-अंतरास्ट्रीय स्तर पर बिभिन्ना प्रदर्शनी में उनके ये प्रतिभा प्रदर्शन करके आतशा नाम कमाया हे।
अभीतक उनको किसी तरह की सहायता केहि से भी नहीं मिली। उन्होंने घर घर जा कर बहुतही मेहनत से भास्कर्य समूह बेसकार अपना परिबार साला रहा हे।
END :




बर्तमान युगो में नए पीढ़ीके लोगोके बिसमे इसतरह की शिल्पकर्म के प्रति आग्रह नहीं हे। किउकी इस तरह की कामो में निश्चित कमाइ की उम्मीद नहीं कर सकते। इस तरह की कामो में कोई ग्लेमर भी नहीं हे। बर्तमान हमारा समाज की सभी दिशाओ में होत्या, हिंसा, अत्यासार, भ्रसटासर बढ़ने के साथ साथ लोगो के बिस आदर सन्मान भी कम हो जा रहा हे। इस सभी के कारन हे लोगोके बिस सिस्ट्रीसिल कर्मो के प्रति अब हेलना तथा सिस्ट्रीसिल एक मन का अभाव। सिस्ट्रीसिल मन में कभी भी अशुभ शक्तिओ ने घर नहीं बना सकता। फिरभी लोग अपने कर्म मोई जीबन में- नकरी, लिखना-पढ़ना, ब्यबसाई अदि सभी को करना होगा। इसी बीज यदि थोड़ा समय निकल के कुछ भी एक सिस्ट्रीसिल कामो को सीखते हे और उसे करना सुरु करता हे बो कुछ भी हो सकता हे, जैसे- संगीत, नृत्य, खेल, लिखना, फोटोग्राफी, डाटा संग्रह अदि कुछ भी हो सकता हे। जो किसीभी तरह से आर्थिक लाभ, या प्रसंसा पाने केलिए नहीं सिर्फ अपना मानसिक सन्ति केलिय किया गया काम। सिस्ट्रीसिल कर्मो से लोग जितनी दूर जायेगा उतनीही मानसिक असंती से भर जायेगा। बर्तमान यही हो रहा हे। इसीलिए इसतरह की शिल्प उद्योग समूह जीबित रखने केलिय समाज की सभी लोगोको एक महान दाइत्वा हे। ताकि हमारा भबिष्य के नोय प्रजन्म के लोग गलत दिशाओ को सौर कर सिस्ट्रीसिल मन को ले कर अत्चाय की दिशाओ में आगे बढ़ सके। इसी तरह श्रीफुलेस्वर डेकाजी ने लकड़िओ में मुर्तिया काटकर एकमात्र खोद की सिस्ट्रीसिल मन को लेकर जीबन संग्राम में सल रहा हे। आधुनिक जीबन की सकासन्द के और ध्यान ना देते हुवे काफी मेहनत से इस शिल्प को जिन्दा रखने की जो प्रयास कर रहा हे ये ससमे एक साहसी और कबीले तारीफ हे।
धनबाद। ..
Contect :
Sri Phuleswar Deka
Ph. 9613619196
M/s. Kanjyoti Vaskarjya Silpa Udyog
Vill- Menapara, P.O. Chapai,
P.S.- Mangaldai
Dist.- Darrang (Assam), PIN- 784529
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