Village- Rajapukhuri, P.O. Lalpur Bazar, P.S. Kalaigaon, Dist- Darrang, State- Assam, PIN- 784514, India
It is located 20 KM towards North from District head quarters Mangaldai.
8 KM from Kalaigaon.
69 KM from State capital Dispur (Guwahati)
राजापुखूरी
गाँव- राजापुखूरी, डाक- लालपुलचौक, थाना- कलाईगाँव, जिल्ला- दर्रांग (असम) पिन- ७८४५१४ (भारत)
नमस्कार ! आज दर्रांग जिल्ला का एक बहुत ही प्राचीन राजापुखूरी नाम का एक खूबसूरत तालाब के बारे में बताने जा रहा हु। ये तालाब कब और किसने खोदाई की इसे जानने का कोई उपाय नेही हे। लेकिन ये तालाब बहुत ही प्राचीन और बृहत् तथा बहुत खूबसूरत तालाब हे। दर्रांग जिला में बहुत सारे प्राचीन तालाबों से भरा हुवा हे लेकिन ये राजापुखूरी नाम का तालाब सबसे बड़ा, खूबसूरत और देखने लायक हे। सारोवर बृहत् पर (किनारे) से घेरा हुवा करीब 160 बीघा जमीन में फैला हुवा ये एक बिशाल तालाब हे। इस तालाब के अनुसार ही पूरी इलाके का नाम राजपुखूरी हुवा हे।
ईतिहास :
मंगलदाई बुरंजी (History of Mangaldai, 1961) में पंडित दिनेश्वर शर्मा देवने इस तालाब के बारे में इस तरह लिखा हे -- कब इस तालाब का निर्माण हुवा था इसका जानकारी किसीभी प्रकार से उपलब्ध नहीं हे। वोहा उस ज़माने के रहने वाला कोई परिवार भी नही हे। वर्तमान जो लोग बसा हुवा हे वो सभी नए असमिआ (New assamese) लोग हे।
शर्मा देवा ने और लिखा हे - पूब दलगाऊँ के अंदर स्थित दलगाऊँ तालाब और पास में स्थित दोल अथवा मोठ का भग्नावशेष को देख के अनुमान किया जा सकता हे की ये इलाका पहले बहुतही उन्नत था। ये दोल यानि मोठ रहने का कारन ही इस इलाके का नाम दोल यानि दलगाऊँ हुवा हे। उस ज़माने का शासक भूयां कुल का राजाओंने इस इलाके को शासन किया था। और उन्ही लोगोने इन तालाबों का निर्माण किया था। इन सभी तालाबों के किनारे में एक मोठ यानि देवालय स्थित होने का नीसाण स्पस्ट रूपसे देखा जाता हे। इन भग्नावशेष का पत्थर या इट का टुकड़ा इन तालाबों के किनारे अथवा इसके अस-पास कुछ कुछ स्थानों पर ठोरा बहुत परा हुवा हे।
वर्तमान स्थिति :
वर्तमान इस तालाब के किनारे कुछ लोगो ने घर बना कर निबस करने लगा हे। पछिम दिशा के पुरे पर यानि किनारे को घर बसाया हुवा हे। तालाब का बिशाल पार यानि किनारे का लग भाग 40 प्रतिशद ध्वंश कर दिया हे। दक्षिण दिशा के पार के निसे किसीने धान का खेती किया हे। इस पर में एक मजीद, एक स्कूल स्थापित किया हे। दर्रांग जिला में जितने तालाब हे इन सभी की पानी भाग जमीन से काफी ऊपर रहता हे। लकिन इस राजापुखूरी के पानी भाग बहुत नेसे और मैदान जैसा देखा जाता हे। और बहुतही कम पानी जैसा लगता हे। करीब जाने के बाद ही इसकी असली रूप देख ने को मिलता हे। पानी भाग देखने से मन में एक अलौकिक भाव क संसार होता हे। इस पानी भाग का गभीरता अंदाजा लगाया नहीं जाता।
*** इस राजापुखूरी तक जाने का सभी रास्ता पिट्छ और सुन्दर हे। इस राजापुखूरी पहुसने से पहले एक सुन्दर चाय का बगीचा मिलता हे। बारबाग़ान नाम का इस चाय का बगीचा के बीजमे से जाना परता हे। बगीचा के बीज से जाना वो भी एक सुन्दर अनुभव हे। राजापुखूरी के ये बृहत् अंचल बंगला भाषी मुसलमान लोगो का निबाश हे।
*** कृषि प्रधान इस इलाके का प्राकृतिक सुन्दर्यै अति खूबसूरत हे। यहा का सभी रास्ते पिट्छ हे सरोवर कृषि भूमि, इसमें पानी युगान का सुन्दर व्यवस्था अदि देखने लायक हे। कलाईगाऊं से राजापुखूरी तक ये बृहत् इलाका बंगला भाषी मुसलमान लोगो से परिपूर्ण एक बहुत बड़ा इलाका हे। स्थान बिसेष लोगोका घर काम-ज्यादा हे लेकिन तालाब के आस-पास लोगो का घर ज्यादा हे। तालाब का बिशाल पार (किनारा) काफी दूर से देखा जाता हे। स्थानीय लोगो के अनुसार कुछ साल पहले तक ये और भी बड़ा था। इस तालाब में बहुत सारे प्राचीन मछली, कछुए से भरा हुवा हे। अभी भी प्राचीन बड़ा मछली यहाँ पाया जाता हे।
*** इस राजापुखूरी तालाब का कोई भी पूर्ब का इतिहास प्राप्त नहीं हुई। लेकिन ये प्राचीन तालाब को वर्तमान जिस तरह बे-दखल हो रहा हे इसको देख के ऐसा लगता हे की बहुतही कम दिनों में ये सम्पूर्ण बे-दखल हो जायेगा। दूसरी तरफ यह बात भी महत्वपूर्ण हे की बे-दखल होने की बाद भी इस तालाब का ऐतीज्य, इसका बिशलता तथा सुन्दर्यै में अभी भी कोई बिशेष प्रभाव पड़ा नहीं।
*** इसीलिए ये इतिहास प्रशिद्ध बहुतही प्राचीन तथा बिशाल तालाब को सरकार की तरफ से संरक्षण करना बहुतही जरुरी हो गया हे। किउकी इतनी सुन्दर तथा बिशाल प्राचीन तालाब सिर्फ दर्रांग जिला का नहीं सारा मानव जाती का सम्पद हे। नाजाने इस तालाब को निर्माण कार्य सम्पूर्ण करने में कितनी लोगो का परिश्रम तथा महान उदेश्य रहा होगा। जिसे होम सभी उपयुक्त सम्मान देना उसित होगा। इतनी सुन्दर एक सम्पद हमारा बीज मजुत हे जिसे देख कर मन आनंदित हो उठेगा। प्रकृति प्रेमिओ के लिए तो ये तालाब बहुतही आकर्षणीय सम्पद होगा।
समाप्त :
दुःख की बात ये हे की दर्रांग जिला का ये प्राचीन राजापुखूरी नाम का तालाब प्रचार माध्यम से काफी दूर में हे। कोई भी इलेक्ट्रोनिक मिडिया भी आजतक इसको दिखाया नहीं। दर्रांग जिला का ये प्राचीन सम्पद कोई भी कारणवस बे-दखल नहीं होना साहिए। इसकेलिए प्रकृति प्रेमी, नए पीढ़ी के लोग, संगठन आदि ससेतन होने के साथ साथ सरकार के तरफ से इसको संरक्षण करना साहिए। तालाब का सारो पार यानि बिशाल किनारे को मुक्त करके नए तरीके से सजाकर पर्यटक केंद्र के रूप में स्थापित करना साहिए। जिससे इस इलाके का बिकाश भी होगा।
*** अंत में ये आशा करता हु बहुत जल्द इस तालाब को संरक्षण करके सभी लोगो को दर्शन केलिए प्रोत्साहित करना साहिए। इस से यहाँ का लोगो के साथ साथ पर्यटन बिभाग को भी जरूर लाभ होगा। साथ में इसका प्रचार करना सहिये जिसे प्रकृति प्रेमी लोग इसको देख के इस प्राचीन तालाब का बिशलता अनुभव कर सके।
*** बिशेष प्राथना ये हे की दर्रांग जिला का ये प्राचीन सम्पद राजापुखूरी नाम का तालाब दुनिया के सामने अपने पूरी गरिमा के साथ हमेशा केलिए समक्ता रहे।
- जोई तो राजापुखूरी और ये पूरी इलाका -
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