Vill- Niz Barampur, P.O.- Patharighat, P.S.- Saipajhar, Dist. Darrang (Assam), Pin- 784, India

पचकिया पुखुरी और पचकिया बुरहिगोखानी थान 

गाऊँ - निजबरमपुर, डाक - पथरीघाट, थाना- सिपाझार, जिल्ला- दर्रांग (असम), पिन- ७८४ , भारत


नमस्कर ! आज दर्रांग जिल्लाके बहुतही प्राचीन पीसले काफी सालोसे जंगल, किसर और बैसीत्रता से भरा हुवा एक तालाब और उसके के साथ जोड़ा हुवा एक अद्भुत देबि थान के बारे में बताने जा रहा हु। 






INTRUDUCTION :

दर्रांग जिला का पश्चिम दिशा में स्थित ऐतिहासिक पथरीघाट से उत्तर दिशा में एक रास्ता हे वोहा से कुछ दूर जाने से बहुतही भीतरी इलाके का एक गाँव हे। गाँव का नाम निजबरमपुर हे। इस निजबरमपुर नामका गाँव में ही पचकिया पुखुरी नाम का एक बहुतही प्राचीन तालाब और साथ में एक पौराणिक देवी स्थान हे। यहा का लोग इस स्थान को बुरहिगोखानी थान बोलते हे। ये मंदिर भी एक अलग तरह का हे। तालाब के पश्चिम दिशा में थोड़ासा बाँस का पैर हे। इसी बाँस की निसे ये देवीस्थान स्थित हे। और इसी बाँस को केंद्रित करके ये मंदिर निर्माण हुवा हे। ये देखने लायक हे। 

*** ये तालाब कब किसने बनाया इसका कोई जानकारी अभीतक नहीं हुवा हे।






वर्तमान स्थिति :
ये तालाब कुछ महीने तक जंगल और किसर से भरा हुवा था।  होमें तालाब को उसी रूप में देख ने की सौभाग्य नहीं हुई। वर्तमान सरकारी यजोना के तहत इस तालाब को साफ किया जा रहा हे। अभी भी सरोवर तालाब से उठाया गया किसर से भरा हुवा हे। तालाब का सिर्फ उत्तर दिशा का ही किनारा हे बाकि तीन दिशा का पर मतलब किनारा नहीं हे। बिलकुल तालाब के पानी के साथ सामान हे। पूव दिशा में कुछ छोटा छोटा तालाब, पंचयत का दफ्तर अदि हे। उत्तर दिशा में भी एक दूसरा तालाब हे। और उत्तर दिशा में ही तालाब से कुछ दुरी में रास्ता के साथ एक L.P. Schol और M.E. School स्थित हे। पछिम दिशा में बुरहिगोखानी थान। 

***  मूल तालाब में स्थानीय लोगोके अनुसार 46 बीघा जमीन हे। साथ में स्कूल और कृखी भूमि को ले कर लग भाग 80 बीघा जमीन तालाब के नाम हे।

***  तालाब के पूर्व दिशा में मुसलमान लोगो का गाँव और बाकि तीन  दिशा में हिन्दू लोगो का गाँव हे।








मंदिर और उत्सव :
तालाब के पछिम पार में महत्वपूर्ण बुरहिगोखानी थान स्थित हे। यहा का लोगोके बिज़ इस मंदिर के प्रति गभीर आस्था हे। हर साल बहाग (April) महीने में 6 और 7 तारीख को यहा पर 2 दिन का वार्षिक पूजा अनुस्थित किया जाता हे। साथ में देउल उत्सव भी मनाया जाता हे। पूजा भी एक अलग तरह की पूजा यहा देखने को मिलता हे। पूजा में सिर्फ अंडा, कबूतर, तेल आदि देवी के नाम पर भेट किया जाता हे। अंडा और कबूतर का ढेर लाग जाता हे। पूजा में काफी भक्तो का भीड़ होता हे। स्थानीय लोग इन भक्तो के लिए सुन्दर व्यवस्था रखता हे। पिने का पानी, प्रसाद बितरण, भोग बितरण आदि सभी सुन्दर तरीके से संसालन करता हे। यहा का प्रसाद और भोग बहुतही स्वादिस्ट हे। साथ में भराल घर, भोग घर, ऑफिस घर, उरिनेल आदि सभी सुबिधाय हे। मंदिर के सामने बिभिन्न पैर-पौधे हे, और प्राकृतिक परिबेश बहुतही सुन्दर हे। लोगोका निबाश भी यहाँ से काफी दूर में है। यहाँ अभीभी बहुत सारा जंगल मजुत हे। जंगल की बीज की रस्ते से ही वोहा जाना होगा। ये भी एक सुन्दर अनुभव हे।  





इसी बाँस की निसे ये देवीस्थान स्थित हे





समाप्त :
इस तालाब के साथ काफी सारे अलौकिक कहानिया जोड़ा होवा हे। स्थानीय लोगोसे ये कहानिया सुना जाता हे। किउकी ये तालाब बहुतही प्राचीन हे इसीलिए इसके साथ काफी सारे कहानिया जोड़ा होना स्वाभाविक हे। 

***  इसिलए वर्तमान नए पीढ़ी के लोग उन इतिहास को खोज कर पचकिया पुखुरी और पचकिया बुरहिगोखानी थान को साथ साथ इस इलाके का प्रचार और प्रखार करना सहिये। ये पचकिया पुखुरी प्रकृतिगत रूपसे ही बहुत सुन्दर हे। अब तालाब साफ होने के बाद थोड़ासा सरकार और लोगोका सहारा मिल जाए तो ये Tourist केलिए आकर्सन का स्थान हो सकता हे, और साथ में पचकिया देवी मंदिर का भी महत्व सारो वोर फैल जायेगा। 

***  अंत में आशा करता हु की बहुत जल्द ये स्थान एक टूरिस्ट स्पॉट बन जाए और सारि दुनिया इसे देखे। 

---- ॐ पचकिए बुरहिगोखानी मंदिर :: जोई तो पचकिए पुखुरी ----

Post a Comment

Thank you for Visiting

Previous Post Next Post