Village- Bareri, P.O.- Deomornoi, P.S. Sipajhar, Dist- Darrang, Assam, PIN- 784147, India
श्रीश्री पलाविता मूल सत्र
श्रीश्री पलाविता मूल सत्र
गाँव- बरेरी, डाक- डोमोरनोई, थाना- छिपाझार, जिला- दर्रांग (असम), पिन- ७८४१४७, भारत
| 452 वर्ष पुराणी बिग्रह |
नमस्कार ! आज में सं 1568 में स्थापित दर्रांग जिल्ला का एक प्राचीन धार्मिक स्थल श्रीश्री पलाविता मूल सत्र के बारे में कुछ जानकारी देनेकी प्रयास करता हु।
*** दर्रांग जिल्ला का सदर मंगलदाई सहर से लग भाग 7 -8 किलोमीटर दुरी में पछिम दिशा की और डोमोरनोई नाम का एक बारे इलाके के अंदर बरेरी नाम का एक गाँव में मुख्य मार्ग के किनारे में ही ये 452 वर्ष पुराणी श्रीश्री पलाविता मूल सत्र अबस्थित हे।
*** इस सत्र को वर्तमान सत्र परिसालन समिति के अध्यक्ष तथा डेयरी श्री देबेन कुमार महंत देव ने दैनिक पूजा-पाठ के साथ साथ शरण-भजन अदि सम्पूर्ण सत्रीय नियमोंके अनुसार पीढ़िओसे साला रहा हे।
| श्रीदेबेन कुमार महंत |
इतिहास :
एक प्राचीन धार्मिक स्थल होने की बाबजुत इसका कोई लिखित इतिहास या दस्ताबेज नहीं हे। देउरी श्री देबेन कुमार महंत के अनुसार दर्रांग प्रशिद्ध श्रीश्री खतरा सत्र और ये श्रीश्री पलाविता सत्र एक ही समय में सायद एक ही उद्देश्य से स्थापित किया गया था, इसीलिए इन दोनों सत्र के अंदर जो विग्रह या मुर्तिया हे बो हूबहू एक ही जैसा हे।
*** पलाविता सत्र के मणिकूट के अंदर जो बिग्रह हे वो इस प्रकार- गरुड़ पक्षी के ऊपर बैठा हुवा भगवन बिष्णु, राम, लक्ष्मण, सीता सामने लव-कुश और बाये तरफ हनुमान जी का एक बड़ा बिग्रह स्थापित हे। विग्रह समूह बहुतही सुन्दर, प्राचीन और देख ने लायक हे।
*** समय के साथ साथ ये पलाविता सत्र में जितने लोग शामिल थे कुछ मतों से मिल न होने के कारण दो भागो में बता गया। और पास में ही पूर्व दिशा में एक दूसरा मंदिर का निर्माण किया हे उसे पलाविता सत्र नाम दिए गए हे। इसीतरह एक पलाविता मूल सत्र और दूसरी तरफ पालविता सत्र नाम से दो स्थान हो गया हे।
| मूल थापना |
वर्तमान स्थिति :
हमारी सभी प्राचीन धार्मिक स्थलों के साथ साथ इस पलाविता सत्र का भी प्रचार और प्रखार के दिशा में बिलकुल अंधकार में ही हे। कोई भी मिडिया आज तक इन प्राचीन स्थानों को प्रचार नहीं किया। इसीलिए अभीतक इस सत्र को सरकार गैरसरकार अदि किसीकी तरफ से भी कोई सहायता नहीं मिला। लकिन शुभ संबाद ये ही की वर्तमान सरकार की नए योजना "असम दर्शन" के तेहद इस पलाविता सत्र को एक मोटा आर्थिक अनुदान देने का घोसना हे। इसका जानकारी श्री देबेन कुमार महंत जी ने दी हे।
*** सत्र के मंदिर गृह बहुतही छोटा हे। सामने एक नदी का सूती हे। दक्षिण दिशा में एक गाँव की क्लब घर हे।
उत्सव :
*** यहां तिथि केन्दिरक सभी अनुष्ठान पालन किया जाता हे। बैसाख महीने की 5 तारीख को यहां पर वार्षिक देउल उत्सव बहुतही धूम धाम से मनाया जाता हे।
*** मूल सत्र के पूर्व दिशा में पलाविता सत्र नाम का (दूसरा भाग) वर्तमान एक बृहत् मंदिर का निर्माण कार्य सल रहा हे।
समाप्त :
इस सत्र को सरकार की तरफ से संरक्षण करना बहुतही जरुरी हे। किउकी प्राचीन इस सत्र का मणिकूट तथा मंदिर बहुतही छोटा हे। यहाँ स्थापित सुन्दर तथा प्राचीन विग्रह समूह रखने का उपयुक्त स्थान तथा परिवेश का अभाव हुआ हे। यहाँ आनेवाला भक्त को बैठने का स्थान बहुत काम हे। इसीलिए आनेवाला दिनों में इस धार्मिक स्थान एक नए दिशा की तरफ आगे बढ़े। और यहां स्थित विग्रह समूह को एक उपयुक्त परिवेश लाभ हो और समाज तथा विश्व के सामने ये श्रीश्री पलाविता मूल सत्र समक उठे।
*** आभार व्यक्त करता हु इस सत्र को वर्षो से सालनेवाला अध्यक्ष तथा देउरी श्री देबेन कुमार महंत का आप एक कृतिमान निवृत्ति प्राप्त शिक्षक हे। आप विभिन्न सामाजिक अनुष्ठान-प्रतिष्ठान के साथ जड़ित एक उद्यमी व्यक्ति कहे। आपका पत्नी तीन उच्च शिक्षित कन्या के साथ एक सुखद परिबार हे। इसके अलवा आपके कुल का दूसरे भाई-भतीजा आदि सभी उच्च शिक्षा से शिक्षित और सरकारी विभिन्न दफ्तरों में उच्च अधिकारी पद में अदिस्थित हे।
*** अंत: में ये श्रीश्री पालाविता मूल सत्र पीढ़िओसे सलाने वाला श्रीदेबेन कुमार महंत देव तथा आपका परिवार का सभी सदस्य का ये प्रयाश समाज केलिए एक आदर्श बने।
ॐ
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