Vill- Nagaon (Bhakatpara), P.O. Hatimara, P.S. Shipajhar, Dist.- Darrang (Assam), PIN- 784144, India
शलगुरी सत्र
गाँव- नगाँव (भकतपारा), डाक- हातिमारा, थाना- छिपाझार, जिल्ला- दररंग (असम), पिन- ७८४१४४, भारत

नमस्कार ! आज में हमारे दररंग जिल्ला का सं 1821 में स्थापित शलगुरी सत्र नाम का एक धार्मिक स्थल के बारे में कुछ जानकारी देने की प्रयाश कर रहा हु। ये दररंग जिल्ला का पच्छिमी हिस्से का बहुतही खूबसूरत इलाका हे।
* परिचय : ये शलगुरी सत्र मंगलदाई सहर से लग-भग 15-16 किलोमीटर दुरी में नगाँव (भकतपारा) नाम का एक गाँव में स्थित हे। इस सत्र तक जानेकेलिए कोई बिशेष असुबिधा नहीं हे। दररंग प्रशिद्ध खतरा सत्र से उत्तर दिशा में इसी रस्ते से करीब 2 किलोमीटर दुरी में मूल रस्ते के किनारे में ही ये मंदिर या सत्र स्थित हे। ये मंदिर नगाँव (भकतपारा) और दगियापारा नाम गाँव ठीक सिमामें ही स्थित हे। इसीलिए दोनों गाँव की लोग यहाँ शामिल हे।
* वर्तमान स्थिति : पूर्ब में ये सत्र (मंदिर) बांच-लेकरि अदि से बना हुवा था। अब कंक्रीट से निर्माण किया गया हे। असम सत्र महासभा की तरफ से एक अत्चा अनुदान मिलने के बाद इस सत्र का मंदिर गृह सुन्दर से निर्माण किया गया हे। मंदिर में अब पानी, बिजुली अदि का भरपूर व्यवस्था किया हुआ हे। मंदिर के आगे उत्तर दिशा में एक रंगमंच और मंदिर गृह के पिसे एक तालाब स्थित हे। सत्र के मूल प्रबेश पथ पर एक बहुतही सुन्दर तोरण बना हुवा हे। इस तोरण में असमिया सत्रीय संस्कृति के कुछ बड्या जंत्र का चित्र निर्माण किया हे। ये चित्र बहुतही सुन्दर और देखने लायक हे।
*** सत्र के अंदर मूल थापना में 500 वर्ष पुराणी एक दशमस्कन्ध भागवत रखा हुवा हे ये साशिपात का हे।
*** साथ में बालगोपाल का एक पीतल का सोटासा बिग्रह मूल थापना में रखा हुवा हे।
*** इस शलगुरी सत्र के नाम वर्तमान 4 बीघा जमीन हे।
* पूजा का व्यवस्था : इस सत्र (मंदिर) में शुवह श्याम रोज पूजा होने के साथ साथ प्रतिदिन शुवह-श्याम भागवत पाठ होता हे। यहाँ आनेवाला दैनिक भक्तो का संख्या बहुतही कम हे। इसीलिए दिन की भागो में देउरी यानि पुजारी मंदिर में नहीं होते हे। जो भी भक्त यहाँ आते हे वो पहले से योगा-योग करके आते हे। ये सत्र निका संहति के अनुसार चलाया जाता हे।
* उत्सव : इस सत्र में श्रीकृष्ण जन्माष्ठमी और श्रीमंत शंकरदेव जी का जन्म उत्सव बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता हे। ये दोनों ही उत्सव इस सत्र का मुख्य उत्सव कहा जाता हे। इसके बाद बैसाग महीने का 1 तारीख को यहा में देऊळ उत्सव मनाया जाता हे। साथ में तिथि केन्द्रिक सभी उत्सव यहाँ मनाया जाता हे। उल्लेखनीय बात हे की इस सत्र में प्रतिदिन शुवह-श्याम भागवत पाठ किया जाता हे। साथ में कार्तिक महीने का पूठि-पाठ अनुष्ठान में पूरी महीना भर रातको काफी भक्त बैठ कर पूठि पाठ में भाग लेते हे।
* आभार : सत्र परिसालन संपादक श्रीबसुंधर सहरिया देव और बंधू श्रीध्रुब सहरिया ने सत्र के बारे में जो कुछ जानकारी दी और सहायता की उसके लिए उन्हें नमन और आभार प्रकट करता हु।
समाप्त : इस सत्र भी प्रचार और प्रखार के बारे में बिलकुल ही अंधकार में हे। आज तक कोई भी प्रचार माध्यम के द्वारा ईसे प्रचार नहीं किया गया हे। इसिलए इस सत्र के बारे में ज्यादातर लोग अग्य हे। अब इस इलाके की लोग आगे आकर इस शलगुरी सत्र को राष्ट्रीय तथा अन्तराष्ट्र्य स्तर पर प्रचार करने की प्रयाश करे।
*** इस तरह की आध्यात्मिक केंद्र प्रतिष्ठा करने की पिसे कितने महान उद्देश्य सोपा हुवा हे उसको जानने केलिए आजकी नई परजन्म को आकर्षित करने की बहुतही आवश्यक हे। इस तरह अनुष्ठान की तरफ से साधारण लोगोकी आध्यात्मिक उन्नति हो इस दिशाओ पर समाज के सभी तरह की लोगोने ध्यान देने की बहुतही आवश्यक हे।
अंत में आशा करता हु की इस शलगुरी सत्र के साथ साथ इस इलाके को भी पूरी दुनिया की लोग देखे और जाने।
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