Founder of Darrang Koch Kingdom, (Reign- 1606 to 1633)
Venue : Mangaldai Town (Barpukhuri Par), P.O.+P.S.- Mangaldai, District- Darrang, State- Assam, PIN - 784125, Inida
राजा धर्मनारायण या वलिनारायणजी का प्रतिमा
(दररंग कोच राज्य प्रतिस्थापक, शासन काल 1606 से 1633)
स्थान - मंगलदाई सहर (बरपुखूरी पार), डाक- मंगलदाई, थाना- मंगलदाई, जिला- दररंग, राज्य- असम, पिन- 784125, भारत।
नमस्कार ! 07-03-2021 तारीख रविबार के दिन दरंग जिल्ला का मुख सहर मंगलदाई के मध्य भाग में स्थित ऐतिहासिक तालाब बरपुखूरी के किनारे में दरंग गौरव कोच राज्य प्रतिष्ठापक महाराज धर्मनारायण या वलिनारयण जी का एक प्रतिमा प्रतिष्ठा किया गया हे। आज में इस महान राजा का प्रतिमा प्रतिष्ठा से जोड़े कुछ जानकारी आपसब को देने की थोड़ासा प्रयाश करूँगा !
**** धर्मनारायण नाम ही जिसका पेशन हे। लग भाग 500 वर्ष पहले दररंग राज्य का प्रतिष्ठापक विश्व महावीर चिलाराय का पोता महाराज रघुदेव का पुत्र थे राजा धर्मनारायण। वह धर्मपरायण, न्यायपरायण, यहाँका क्रिस्टी, संस्कृति का प्रोत्साहन देनेवाला, सभी धर्मो का आदर करनेवाला एक महान राजा था।
**** दुःख की बात हे की भारतवर्ष या बिदेशो में भी बिभिन्न सहर नगर में इतिहास प्रशिद्ध, महान लोगोका मुर्तिया अपना अपना इलाका में निर्माण करके रखा हुवा हे। लेकिन इस काफी प्रतिभा सम्पन्न राजा की इतिहास संरक्षण या मूर्ति प्रतिष्ठा केलिय राजपरिबार, यहा का लोग और सरकार की तरफ से भी कोई भी कदम उठाया नहीं गया।
**** सुख की बात ही की 500 वर्ष के बाद अब इस महान राजा धर्मनारायणजी का मूर्ति प्रतिष्ठा केलिय उनका ही बंशस तथा Debsons Group का स्वत्वाधिकारी डा: अमरेन्द्र नारायण देव ने ये कदम उठाया हे। डा: अमरेन्द्र नारायण देवने खोडकी धन से इस इतिहास प्रशिद्ध राजा का मूर्ति मंगलदाई सहर का बरपुखूरी नामकी तालाब के किनारे पूरी अनुस्थानिकतासे प्रतिष्ठा किया गया हे। इस अनुष्ठान में बहुत सरे दिगज लोग उपस्थित थे।
**** अंत में डा: अमरेन्द्र नारायण देवजी ने इस मूर्ति निर्माण तथा प्रतिष्ठा करके एक महान कर्म प्रेरणा का इतिहास दुनिया के सामने उजाकर किया हे। आपका ये महान प्रयाश केलिय आप और आपका परिवारका सभी को बहुतसारे शुभकामनाय।
**** आशा करता हु की इसीतरह दरंग राजघराने का अलग अलग कृतिस्थान समूह संरक्षण केलिए आप साथ में स्थानिए लोग भी आगे आए और हमारा ये दरंग राज्य का प्राचीन इतिहास पूरी विश्व के आगे समक उठे साथ में पूरी दुनिया इसके बारे में जाने।





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