बैरागी सत्र
गाँव- जलजली, डाक- जनारामचौक, थाना- मंगलदाई, जिला- दर्रांग (असम), पिन- ७८४१२५, भारत।
Vill- Jaljali, P.O.- Janaramchowk, P.S.- Mangaldai, Dist- Darrang (Assam), PIN- 784125, India
Vill- Jaljali, P.O.- Janaramchowk, P.S.- Mangaldai, Dist- Darrang (Assam), PIN- 784125, India
| New Manikut under construction |
नमस्कार ! आज में दररंग जिला के एक प्राचीन आधात्मिक केंद्र श्रीश्रीबैरागी सत्र के बारे में कुछ जानकारी देने की प्रयाश करंगा।
परिचय : हमारा दररंग जिला का मुख्य सहर मंगलदाई से लग-भाग 7-8 की:मि: दुरी में पछिम दिशा में जलजली नाम का एक गाँव में ये श्रीश्री बैरागी सत्र अवस्थित हे। ये सत्र 1484 शकाब्द में प्रतिष्ठित किया गया था। इसे श्रीश्रीअनिरुद्ध देव गोस्वामी ने प्रतिष्ठा किया था। ये बैरागी सत्र किसी ज़माने में निश्चित रूप से इस इलाके का बहुतही महत्वपुर्ण आध्यात्मिक केंद्र हुवा करता था। सायद इसीलिए दररंगी कोच राजा महेंद्र नारायण देव ने इस सत्र के नाम 60 एकर भूमि देवोत्तर दान किया था।
वर्तमान स्तिथि : वर्तमान इस सत्र का हालात बहुत ही नाजुक हे। टूटी फूटी एक मंदिर गृह में ही दैनिक पूजा-पाठ का काम साल रहा हे। अतसी खबर ये हे की वर्तमान एक नए मणिकूट गृह निर्माण का काम हो रहा हे। इस सत्र का जो प्राचीन सम्पद हे वो सत्राधिकार के घर में सुरक्षित हे। सत्र की मूल थापना में प्राचीन नक्काशी खोदित एक पत्थर और दो जटाधारी पत्थर स्तापित करके रखा हुवा हे।
वर्तमान सत्र के सत्राधिकार - श्रीभुवन देव गोस्वामी और
सभापति - श्रीज्योतिष गोस्वामी।
*** वर्तमान सत्र परिसालाना समिति के सभापति के द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार इस सत्र में करीब 1200 शिष्य हे। ये शिष्य ज्यादातर राजघराने का (कोवर) लोग इस सत्र के प्रधान शिष्य हे। इसके इलवा खोइराबारी अंचल का कुछ राभा संप्रदाय के लोग इस सत्र का शिष्य थे। लेकिन इन लोगो से अभीतक कोई संपर्क नहीं हुवा हे।
उतसव : इस बैरागी सत्र में मनाया जानेवाला कुछ उतसव से में प्रमुख हे -
*** छोट महीने की शुक्लपक्ष के द्रितीय और तृतीया तिथि में प्रतिस्थापक श्रीश्रीअनिरुद्ध देव गोस्वामी का तिरोभाव तिथि बोरी धूम धाम से हर साल मनाया जाता हे। इस उतसव में बिभिन्न स्थान से शिस्यो का आगमन होता हे। ये उतसव सुबिधा के अनुसार सत्राधिकार के घर या मंदिर प्रांगण में अनुष्ठित किया जाता हे।
*** हर साल बोहाग महीने का 27 तारीख को यहाँ देउल उतसव मनाया जाता हे।
*** हर साल संकरजयंती उतसव मनाया जाता हे।
समाप्त : इस बैरागी सत्रको को यहाँ का दूसरे प्राचीन आध्यात्मिक केंद्र की तरह प्रचार और प्रखार की दिशा से बिलकुल अंधकार में हे। साथ में इस सत्र का भी कोई लिखित कोई भी दस्ताबेज नहीं हे। इस तरह देखा जाय तो इस बैरागी सत्र के इतिहास जननेकेलिय बहुत सारे तथ्य मजुत हे जो नए युवाओ को रिचार्च करने के लिए एक अच्छा श्रोत हो सकता हे।
प्राचीन तथा राज जमाने का ये बैरागी सत्र साथ में इसका जो प्राचीन सम्पद समूह संरक्षण होना साहिय। साथ में इस बैरागी सत्र को अधिक कार्यखयम करके आनेवाला नोय पीढीको आध्यात्मिक और मानसिक विकाश की उन्नति के दिशा में काम करे।
अंत में आशा करता हु की आनेवाला दिनों में ये श्रीश्री बैरागी सत्र अधिक कार्यखम होने के साथ साथ दररंग जिला का नाम भी विश्वा के आगे समक उठे और इसे ज्यादा से ज्यादा लोग जाने।
ॐ
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