श्रीमंत शंकरदेव सत्र ओटला
गाँव - बेंगाबोरा, डाक- ओटला , थाना- मंगलदाई, जिला- दररंग (असम), पिन- 784525, भारत
Vill- Bengabara, P.O.- Outala, P.S.- Mangaldai, Dist- Darrang (Assam), Pin- 784525, India

नमस्कार ! आज में दररंग जिला का सं 1962 में स्थापित एक आधुनिक आध्यात्मिक केंद्र श्रीश्रीशंकरदेव सत्र के बारे में कुछ जानकारी देने की प्रयास करूँगा।
परिचय : दररंग जिला के सदर मंगलदाई सहर का पछिम-उत्तर कोने में लग-भग 8-10 की: मि: दुरी में ओटला नाम का एक बहुत ही सुन्दर इलाका हे वही बेंगाबोरा नाम का एक बहुति खूबसूरत गाँव में ये श्रीमंत शंकरदेव सत्र अबस्थित हे। ये सत्र दाररंग जिला में स्थित सभी प्राचीन सत्र समूह से काफी नए हे। फिर भी ये सत्र सम्पूर्ण सत्रीय निति-नियमोंसे सलया जा रहा हे। यहाँ हरदिन नियमित रूपसे सत्रीय नृत्य, अंकिया नट, भोरतल नृत्य, थिया नाम अदि का अभ्यास सलता रहता हे। इसके अलावा 24 युगल पाल नाम का कीर्तन किया जाता हे। ये पाल नाम का कीर्तन कभी एक साथ 24 घटा आवर कभी 6 घंटा तक चलता हे। ये लोक संस्कृति देखने लायक हे।

इतिहास : श्रीमंत शंकरदेव सत्र दर्रांग स्थित प्राचीन सत्र समूह से नए हे। कारन इसे सं 1962 में ही प्रतिष्ठा किया गया हे। ये श्रीमंत शंकरदेव सत्र सत्र असम का सत्र नगरी बरपेटा का सुंदरदिया सत्र के साथ गभीरता से जोड़ा हुवा हे। कारन उस समय में इस इलाके का कुछ धार्मिक तथा महान लोगोकी प्रयास से बारपेटा सुंदरदिया सत्र से 10 सचिपोटिया ग्रन्थ के साथ साथ एक जलंत दिया लाकर ये श्रीमंत शंकरदेव सत्र प्रतिष्ठा किया था। तभी से सत्र के मूल बेडिपर 10 म सचीपतिया ग्रन्थ को रखा गया हे। और साथ में उस दिया को भी पूरी सन्मान के साथ आज भी जोलाके रखा गया हे।
*** ये श्रीमंत शंकरदेव सत्र सम्पूर्ण निका संहति के अनुसार सालता हे ***
वर्तमान स्तिथि : ये श्रीमंत शंकरदेव सत्र वर्तमान असम सत्र महा सभा के अंतर्गत पञ्जिभुक्त हुआ नहीं हे। और कोई भी सरकारी या गैरसरकारी अनुदान भी प्राप्त होवा नहीं। इस गाँव का धार्मिक लोगोने खोद की प्रयाश से सत्र का मंदिर गृह, मणिकूट अदि सुन्दर रूपसे निर्माण किया हे। यहाँ शुभ-श्याम हरदिन पूजा-पाठ चलता रहता हे। साथ में सत्रीय संस्कृति का नृत्य-गीत अदि नियमित रूपसे सर्चा होते रहते हे। और हरदिन नाम-कीर्तन होते रहते हे।
वर्तमान सत्र के सम्पद :
1. इस सत्र में लकड़ी से निर्मित एक 7 तरप का गुरु आसन हे।
2. इसी गुरु आसन में 10 सचीपतिया ग्रन्थ को मान्यतासे रखा हुवा हे।
3. इस सत्र का मंदिर गृह काफी बड़ा और देखने में सुन्दर हे।
4. सत्र के प्रांगण में 2 बीघा जमीन और कुछ दुरी में 10 बीघा जमीन हे।
5. एक सत्रीय संगीत महाविद्यालय हे।
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| Sri Amarendra Deka, Ex-President this Satra |
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| Bhakat and Cultural Pandit Sri Atul Bhagawati |
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| इस सत्र का एक सेवक |
बेंगाबोरा सत्रीय संगीत महाविद्यालय :
इस सत्र के अंदर बेंगाबोरा सत्रीय संगीत महाविद्यालय नाम एक महाविद्यालय प्रतिष्ठा किया गया हे। ये एक समयोपयोगी महान प्रयाश हे। यहाँ सत्रिया तथा सभी तरह की लोक संस्कृति का प्रशिक्षण दिया जाता हे। प्रशिक्षक हे सत्र का भकत श्रीअतुल चंद्र भगवती जी।
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| श्रीमंत संकरदेव सत्र का मूल तोरण |
समाप्त : ये श्रीमान शंकरदेव सत्र भी प्रचार और प्रखार की दिशा में बहुतही पिसे हे। आजतक कोई भी मिडिया आजतक इसे प्रचार नहीं किया गया। देखा जाता हे की इस सत्र में सत्रीय संस्कृति का लग-भग सभी को यहाँ पर अभ्यास किया जाता हे। सत्र का परिबेश भी बहुतही खूबसूरत हे। साथ में ये गाँव भी प्राचीन और बहुतही सुन्दर हे। इस सत्र का सबसे महत्यपूर्ण कार्य हे की यहाँ स्थापित सत्रीय संगीत महाविद्यालय हे। जिसके द्वारा इस गाँव का आध्यात्मिक दिशा की काफी उन्नति हुवा हे। साथ में इस इलाके का जो स्थानीय लोक संगीत, लोक नृत्य, अदि आज लग-भाग लुप्त होने की तदार पर हे। जानकारी और सर्चा के आभाव होने से नए पीढ़ी के लोग भी इसे अपनाने से दूर भाग रहा हे। इस श्रीमान शंकरदेव सत्र के महान प्रयासोने वही लोक संस्कृति समूह यहाँ पर प्रशिक्षण के साथ साथ करने की जो प्रयाश अपने ऊपर लिया हे प्रकृतार्थत ये बहुतही सराहनीय महान कार्य हे।
इसीलिए लोगोसे आग्रह करता हु की सभी लोग इस श्रीमंत शंकरदेव सत्र को दर्शन करे। यहाँ सत्रीय कला-क्रिस्टी को देखे और हमारा आनेवाला नए पीढ़ी लोगोको दररंग जिला का ये लोक संगीत, लोक नृत्य अदि प्रशिक्षण लेके अपना आध्यात्मिक गियान को शक्तिशाली करने के साथ इस सत्रिया संगीत महाविद्यालय का नाम रोचन करे।
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| लड़का-लेरकी बिहू नृत्य करने जा रहा गाँव के अंदर |
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| बच्चो का ये खिलता हुवा रूप गाँव में अक्सर देखा जाता हे |
अंत में आशा करता हु की सरकार तथा NGO अदि को इस सत्र के प्रति शुभ दृस्टि परे। किउकी इस सत्र में जो सत्रिया संगीत महाविद्यालय प्रतिष्ठा करके हमारे लोक संस्कृत का शिक्षा देने का प्रयाश कर रहा हे उसे और आगे ले जा सके उसका व्यबस्था ग्रहण करे। जिसके द्वारा हमारा ये लोक संस्कृति फिर जी उठेगा और श्रीमान शंकरदेव सत्र के साथ साथ बेंगाबोरा सत्रिया संगीत महाविद्यालय का नाम विश्व के आगे समक उठे। और हमारा दररंगी लोक संस्कृति पूरी दुनिया के सामने पुनः समक उठे उसीका शुभकामना।
- जोयतो श्रीमंत शंकरदेव सत्र, जोयतो बेंगाबोरा सत्रिया संगीत महाविद्यालय-
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